तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है। कवि अदम गोंडवी की यह पंक्तियां आज के ग्रामीण परिदृश्य में बिलकुुल सही बैठ रही हैं। कोरोना संक्रमण ग्रामीण इलाकों में तेजी से पांव पसार रहा है। शासन के दावों और हकीकत में बड़ा अंतर नजर आ रहा है। गांवों में लगातार मौतें हो रही हैं। न तो जांच हो रही है न ही दवाओं के इंतजाम हैं। हालत यह है कि शायद ही कोई ऐसा गांव बचा हैं जहां पिछले एक महीने में कई मौतें न हुई हों। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि गांवों में अब तक दो बार स्वास्थ्य सर्वे किया जा चुका है लेकिन कई गांवों के प्रधानों का कहना है कि उनके गांवों में स्वास्थ्य विभाग की कोई नहीं आज तक नहीं गई।
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prayagraj news : एसआरएन में मरीज को भर्ती कराने लेकर आते परिजन।
- फोटो : prayagraj
शासन और प्रशासन का दावा है कि गांवों में संक्रमण अब घट रहा है। मौतों की संख्या भी कम हो रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार सर्वे, सैनिटाइजेशन, दवा और किट का वितरण कर रही हैं लेकिन गंगापार और यमुनापार के तमाम इलाकों में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से बात हुई तो आंकड़े बिल्कुल उलट हैं। स्वास्थ्य सुविधाएं एकदम बैठ गई हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पिछले डेढ़ महीने में जितनी मौतें हुई हैं उतनी उन्होंने पूरी जिंदगी में नहीं देखा था। गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं वेंटिलेटर पर हैं। कहीं स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लटके हुए हैं तो कहीं डॉक्टर ही नहीं हैं। कई जगह तो दवाएं भी मरीजों के लिए उपलब्ध नहीं है।
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फार्मासिस्ट के सहारे स्वास्थ्य सुविधाएं चल रही हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि इन हालातों में आखिरकार कैसे गांवों में कोरोना की दूसरी लहर पर काबू पाया जा सकेगा। गंगापार में बहादुरपुर, लालगोपालंगज, सैदाबाद, हंडिया, धनूपुर, फूलपुर, सहसों, बहरिया, प्रतापपुर, सोरांव, होलागढ़, कौड़िहार, श्रृंगवेरपुर, मऊआइमा, नवाबगंज में फैल रहे कोरोना ने स्वास्थ्य विभाग की ग्रामीण स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी है। गांव स्तर की स्वास्थ्य व्यवस्था आशाओं पर टिकी हुई है। कोरोना का उपचार देहात में पैरासिटामोल टैबलेट के बल पर किया जा रहा है। गांव स्तर पर हो रही लापरवाही के चलते ग्रामीणों की जान खतरे में है।
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कोटवा प्रधान संकर्षण सिंह का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई सहयोग ही नहीं मिल रहा है। गांव में सैनिटाइजेशन भी प्रधान अपने खर्चे पर करा रहे हैं। गांव के पंकज, मनोज ने बताया कि यहां स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों को रामभरोसे छोड़ दिया है। जमुनीपुर ग्रामसभा के प्रधान धर्मेंद्र कुमार त्रिपाठी का कहना है कि सबकुछ अपनी ओर से कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी अभी तक हमारा हाल भी पूछने नहीं आए हैं। गांव के सौरभ और उमेश का कहना है कि हर घर में कोई न कोई बीमार है लेकिन स्वास्थ्य विभाग उदासीन बना हुआ है।
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लीलापुर कला गांव के अशोक और रमेश का कहना है कि गांवों के हालात बद से बदतर हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग को इसकी सुध नहीं है। सोरांव के कृष्णापुर गांव की प्रधान अर्चना पटेल ने बताया कि आज तक स्वास्थ्य विभाग का कोई भी डाक्टर उनके गांव में नहीं पहुंचा। रामनगर गांव प्रधान मनीष गुप्ता ने बताया कि ग्राम निगरानी समिति ही घरों में जाकर लोगों का हाल ले रही है। स्वास्थ्य विभाग की कोई भी सर्वे टीम आज तक गांव नहीं आई है। सोरांव के प्रधान शाहिद अली ने बताया कि उन्होंने अपने निजी मद से ट्रैक्टर और जेसीबी लगाकर गांव मुहल्ले की सफाई कराई।