कश्मीर, डोकलाम या फिर सियाचिन की बर्फीली सीमाएं, जवानों की मुस्तैदी काबिले तारीफ है। वहीं देश के भीतर भी कोई बड़ा या कठिन काम हो तो जवान हमेशा मुस्तैद रहते हैं। करीब 25 किलोमीटर की सीमा में बसे कुंभ मेले में सेना-पुलिस की मुस्तैदी देश की सीमा से कम नहीं। रात में कड़कड़ाती ठंड, दिन में उड़ती धूल इनका मनोबल नहीं तोड़ पाती है।
पूरी तन्मयता के साथ जल, नभ और थल से करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा कर रहे हैं। इनकी चौकसी का नतीजा रहा कि मेले में छिटपुट घटनाओं को छोड़ कोई बड़ी घटनाएं नहीं हुई।
कुंभ मेला का विस्तार 25 किलोमीटर की सीमा में किया गया है। इसमें बाबाओं के अखाड़े, धार्मिक पंडाल के साथ-साथ कल्पवासियों के शिविर भी बने हैं। इनकी सुरक्षा के लिए केन्द्रीय अर्ध सैनिक बल और राज्य पुलिस ने हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था बनाई। इसके तहत राज्य की पुलिस और पीएसी की बीस कंपनियों के साथ ही अर्धसैनिक बलों में एसएसबी, बीएसएफ, आईटीबीपी, आरएफ और सीआईएसएफ की कुल 39 कंपनियों को लगाया गया।
इसके अलावा एनडीआरएफ की दो, एसडीआरएफ की दो, बीडीडीएस की पांच, नागरिक पुलिस के 50 इंस्पेक्टर, 550 एसआई, 450 हेड कांस्टेबल और 5800 सिपाही तैनात हैं। इसी तरह सशस्त्र पुलिस बल के 6 इंस्पेक्टर, 21 एसआई, 125 हेड कांस्टेबल व 450 सिपाहियों को लगाया गया है। वहीं यातायात व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए पुलिस के 5 इंस्पेक्टर, 12 एसआई, 50 हेड कांस्टेबल, 225 सिपाही के अलावा महिला पुलिस की तीन इंस्पेक्टर, 40 एसआई, 20 हेड कांस्टेबल और 400 सिपाही तैनात किए गये हैं।
मेले में 6500 होमगार्ड्स ने भी अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाई तो अग्निशमन विभाग भी मेले में आग की घटनाओं को रोकने के लिए अधिकारियों समेत 82 कर्मी लगे रहे। यहां तक करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए उत्तराखंड पुलिस से दो कंपनी पीएसी और सिविल पुलिस की 5 और 20 एसआई के साथ एक डिप्टी एसपी और 35 हेड कांस्टेबल और 65 सिपाही को तैनात किया गया है।
ये सभी जवान मेले की सुरक्षा में चार मार्च तक लगे रहेंगे। डीआईजी के वाचक कक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे इंस्पेक्टर उपेन्द्र सिंह की मानें तो सभी सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी सामान्य तौर पर आठ-आठ घंटे की लगाई जाती है और पर्वों के दिनों में इनकी ड्यूटी 12-12 घंटे लगाई जाती है।