मौनी अमावस्या स्नान महापर्व पर शुक्रवार को गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। सभी नौ घाटों पर भारी भीड़ रही। दो दिन पहले से ही प्रदेश और देश के कोने-कोने से श्रद्धालु संगमनगरी पहुंचने लगे थे। जीटी जवाहर चौराहे से लेकर संगम तट तक सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक बंदोबस्त किया गया है। श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा भी की गई।
मौनी अमावस्या : संगम पर उमड़ा आस्था का ज्वार, हेलीकॉप्टर से बरसाए गए फूल
गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में मौनी अमावस्या पर आस्था का ज्वार उमड़ पड़ा। सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक बंदोबस्त किया गया है। श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा भी की गई। मेला प्रशासन के अनुसार माघ मेले के तृतीय स्नान पर्व मौनी अमावस्या के अवसर पर शाम चार बजे तक लगभग 1 करोड़ 95 लाख लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई।
रेलवे ने चलाई 6 स्पेशल ट्रेन, रोडवेज ने 1900 बसों का किया संचालन
माघ मेले के सबसे बड़े स्नान पर मौनी अमावस्या के मौके पर दोपहर 2:00 बजे तक रेलवे द्वारा प्रयागराज जंक्शन, प्रयागराज रामबाग और प्रयाग जंक्शन से अच्छा स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा चुका है। इस दौरान प्रयागराज जंक्शन से कानपुर और पंडित दीनदयाल उपाध्याय, प्रयाग जंक्शन से अयोध्या के लिए दो ट्रेन एवं प्रयागराज रामबाग से वाराणसी और भटनी के लिए एक स्पेशल ट्रेन चलाई गई। वहीं रोडवेज द्वारा दोपहर 2:00 बजे तक तकरीबन 1900 बसों का संचालन किया जा चुका है।
प्रयागराज जंक्शन पर बनाए गए कंट्रोल टावर से 312 सीसीटीवी कैमरा से माघ मेला क्षेत्र से लेकर शहर के सभी 8 रेलवे स्टेशन की निगरानी की जा रही है। जंकशन पर सुबह 11:00 से 12:00 के बीच में अचानक से भीड़ उमड़ी थी।
आठ हजार फुट लंबे घाटों पर आधी रात से ही शुरू हो गई थी मौन डुबकी
माघ मेले के सबसे बड़े स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर पुण्य की मौन डुबकी लगाने के लिए एक दिन पहले ही आस्था का जन सैलाब उमड़ पड़ा। देर शाम तक लाखों श्रद्धालु संगम पहुंच गए और आधी रात से ही मौन डुबकी शुरू हो गई। भीड़ का आलम यह है कि शिविर दोपहर बाद ही पैक हो गए।
मौनी अमावस्या स्नान के लिए पिछले दो दिन से देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं केे आने का सिलसिला जारी है। बुधवार की रात से मेला क्षेत्र की सड़कों पर शुरू हुआ श्रद्धालुओंं का तांता बृहस्पतिवार की सुबह जन सैलाब में तब्दील हो गया। संगम की रेती पर झोला, गठरी लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला देर रात तक चलता रहा।
मौनी अमावस्या पर भीड़ के अनुमान को देखते हुए गंगा के दोनों तटों पर आठ हजार फुट लंबाई में स्नान घाट बनाए गए हैं।
सेक्टरवाइज बनाए गए 12 घाटों पर मौन डुबकी के लिए इंतजाम किए गए हैं। गंगा के दोनों तटों पर बने स्नान घाटों पर सर्कुलेटिंग एरिया भी बढ़ा दी गई है। देश के कोने-कोने से मौनी अमावस्या पर आने वाले श्रद्धालुओं के अनुमान को देखते हुए हर घाट पर पर्याप्त संख्या में चेजिंग रूम बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि महिला स्नानार्थियों को कपड़े बदलने में दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
रात भर किनारे ही लेटे रहे श्रद्धालु
शाम तक मेला क्षेत्र में हरिहर गंगा आरती स्थल के प्लेटफार्म पर खुले आसमान के नीचे हजारों की तादाद में श्रद्धालु बोरे और प्लास्टिक बिछाकर डुबकी के लिए इंतजार की घड़ियां गिनते रहे। जौनपुर के मुंगराबादशाहपुर से आईं रुक्मिणी तिवारी, शैलजा और सुमित्रा को इस बार तीर्थपुरोहित वैभव चंद्र मिश्र के शिविर में टेंट नहीं मिल सका।
ऐसे में आठ से अधिक महिलाओं के साथ वह खुले आसमान के नीचे ही आग जलाकर लिट्टी-चोखा लगाने लगीं। इसी तरह काली मार्ग पर पांटून पुल पार होते ही चकर्ड प्लेट सड़क की पटरियों पर सैकड़ों की तादात में श्रद्धालु जगह-जगह अपनी गठरी और बोरे लेकर डुबकी शुरू होने का इंतजार करते रहे।
पूरे मेला क्षेत्र में शिविरों में कहीं जगह नहीं रही। काली मार्ग पर प्रयागवाल सभा के अध्यक्ष रहे डॉ. प्रकाश चंद्र मिश्र के शिविर में जगह न होने पर दो सौ से अधिक श्रद्धालुओं को वापस होना पड़ा। देवरिया के रामरेखा मिश्र ने बताया कि दो हजार रुपये देने पर भी रात भर झोला-बोरा रखने के लिए छोलदारी नहीं मिल सकी। मेले में सेक्टर एक से लेकर पांच तक हर तरफ भीड़ का ऐसा दृश्य था।
इन घाटों हैं डुबकी के इंतजाम
परेड क्षेत्र से मेला क्षेत्र की ओर आने वाले स्नानार्थियों के लिए राम घाट, संगम घाट पर ही स्नान करने की है व्यवस्था।
झूंसी की ओर से मेला क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं/स्नानार्थियों के लिए झूंसी की तरफ बने स्नान घाटों डुबकी की सुविधा।
मेला क्षेत्र में प्रवेश और निकास के रूट
मेला क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालु परेड से झूंसी की ओर प्रवेश करने के लिए पांटून पुल नंबर एक, तीन और पांच से होकर गुजरेंगे।
इसी तरह झूंसी से परेड की तरफ आने के लिए पांटून पुल नंबर दो, चार और छह से होकर मेला क्षेत्र से बाहर आने की है व्यवस्था।