अघोर का मतलब निराकार है। अघोर किसी से डरता नहीं है। वह शांति से रहता है। वह समाज से मिलकर रहता है और चिंतन करता है कि यह समाज भी अच्छे से रहे। वह समाज को डराने के लिए नहीं बना है। अघोरी की दुनिया वास्तविक नहीं होती है, वह पृथ्वी पर एक शिव तत्व के रूप में रहता है। शिव जी को समझना आसान नहीं है, हमें इसके लिए शांति की आवश्कता होती है। इसलिए हम मशान घाट में रहते हैं। मशान घाट में हम इसलिए भी रहते हैं कि वहां पर आदमी सबकुछ त्याग कर पहुंचता है। जब आप भी अपने किसी साथी, संबंधी की मौत पर वहां पहुंचते हैं तो कुछ पल का वैराग्य धारण कर लेते हैं। हम लोग वहीं रहते हैं तो हमारे जीने की इच्छा वैसे ही खत्म हो जाती है। जीने का मतलब ही कुछ अच्छा मार्ग समाज को दिखाकर जाओ। जो लोग खोपड़ी पकड़कर हाथ में लेकर घूमते हैं और समाज को भयभीत करते हैं। इससे लोगों में हमारे प्रति गलत धारणा आ जाती है।
Mahakumbh 2025: अघोरी... ऐसे राज जो डराते नहीं, सोचने पर मजबूर करते हैं; नरबलि, महिला अघोरी और श्मशान
सार
अघोरी.. शैव धर्म के तंत्र साधना करने वाले साधु-संत। अघोरी शब्द संस्कृत के 'अघोर' शब्द से बना है जिसका मतलब है निर्भय। साधु शिव और काली के उपासक। जिनके बारे में लोगों ने बुरा ही सुना है। आज मेरी यात्रा का केंद्र अखिल भारतीय अघोर अखाड़ा परिषद रहा। यहां पर मेरी मुलाकात अघोरी भोलानाथ जी से हुई और उन्होंने अघोरियों से जुड़े बहुत सारे राज हमारे सामने खोले। उनमें एक ये भी था कि जब उनके गुरु ने कहा कि आज तो प्रसाद नरबलि का लगेगा तो उन्होंने क्या किया। इनके आश्रम में पहुंचने पर सबसे पहले हमें जो पढ़ने को मिला वह था "अघोरी ज्ञान ग्रंथों या पुस्तकों से प्राप्त नहीं किया जा सकता। यह महाज्ञान एक पूर्ण जीवन है जिसको जीकर ही अनुभव किया जा सकता है।
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