फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Magh Mela: कल्पवास: माघे मासि प्रयागे तु वासः कल्पसमो भवेत, माघ मास में संगम तट पर नियमपूर्वक रहने का है विधान

Fri, 02 Jan 2026 06:17 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 02 Jan 2026 06:17 PM IST
सार

बैकुंठधाम आश्रम अलोपीबाग स्थित प्रयाग पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य श्रीधराचार्य महाराज ने बताया कि गंगा-यमुना के संगम तट पर माघ मास में जब मकर के सूर्य होते हैं तभी कल्पवास किया जाता है।

विज्ञापन
Magh Mela: Kalpvas: Maghe Masi Prayage Tu Vaas: Kalpasmo Bhavet, there is a rule to stay regularly on the bank
माघ मेले में तेजी से पहुंच रहे श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला।

बैकुंठधाम आश्रम अलोपीबाग स्थित प्रयाग पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य श्रीधराचार्य महाराज ने बताया कि गंगा-यमुना के संगम तट पर माघ मास में जब मकर के सूर्य होते हैं तभी कल्पवास किया जाता है। यहां एक मास तक एक पहर भोजन, तीन बार स्नान करके अग्नि-सूर्य पूजन करके लोग एक मास तक संगम तट पर निवास करने को कल्पवास कहते हैं। माघ मास में प्रयाग में किया गया निवास एक कल्प के बराबर पुण्य प्रदान करता है। सभी पाप नष्ट होते हैं। पुरखों को तृप्ति मिलती है।



साधक को ब्रह्मलोक और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्रयाग महात्म्य में कहा गया है कि कल्पवासी को संगम में तीन बार स्नान करना चाहिए। स्नानमात्रेण मुच्यन्ते नराः पापात् सहस्रशः। संगम में केवल स्नान मात्र से ही मनुष्य हजारों पापों से मुक्त हो जाता है भूमि पर शयन, एक समय सात्विक भोजन, ब्रह्मचर्य एवं संयम, नित्य जप-तप, ध्यान, हवन, अन्न, वस्त्र, तिल, घृत का दान, सत्य, अहिंसा और शुद्ध आचरण करना चाहिए। धार्मिक स्रोतों के अनुसार मान्यता है कि कल्पवास केवल धार्मिक अनुष्ठान न होकर आध्यात्मिक साधना, सामाजिक समरसता, संयमित जीवन-शैली का आदर्श है।


क्या है कल्प

कल्प एक काल की ऐसी स्थिति है, जिसको माप कहते हैं। काल मापक यंत्र है कल्प। “विगता कुंठा विकुंठा विकुंठे भवा वैकुंठा'''' एक कल्प तक बैकुंठ में कुंठा रहित जीवन व्यतीत करना, एक कल्प तक संगम तट पर एक मास निवास करने का फल है।
Magh Mela: Kalpvas: Maghe Masi Prayage Tu Vaas: Kalpasmo Bhavet, there is a rule to stay regularly on the bank
माघ मेले में ठंड से बचने के लिए अलाव के पास बैठीं कल्पवासी महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला।

स्वर्णदान के बराबर है तिल दान

प्रयाग महात्म्य के मुताबिक, माघ का तिल दान अन्य मास के स्वर्ण दान के बराबर है। तिल का दान महत्व किसी ब्राह्मण या वेद पढ़ने वाले ब्राह्मण को ही दान करने पर ही है। ऐसा ब्राह्मण जो वेद कर्म करता हो, वेद की विधि का पालन करता हो, वेद के नियमों से अपना जीवन व्यतीत करता हो, उस ब्राह्मण को एक तिल अथवा छः तिल दान करने को षटतिला कहते हैं। माघ में ही षटतिला होती है। षटतिला के दिन छः तिल के लड्डू का दान करने से सुमेरू गिर पर्वत के बराबर सोना दान करने का फल मिलता है।

Magh Mela: Kalpvas: Maghe Masi Prayage Tu Vaas: Kalpasmo Bhavet, there is a rule to stay regularly on the bank
माघ मेले में पहुंच रहीं कल्पवासी। - फोटो : अमर उजाला।

दो मास के पक्ष सित और असित

सित और असित यही दो मास के पक्ष हैं। सित गंगा है और असित जमुना है। जमुना काली है, कालिंदी है सूर्यतनया है। वो कृष्ण की प्रियतमा भार्या है। असित मास और सित मास दोनों का सामंजस्य केवल प्रयाग में है। कृष्ण जल और श्वेत जल दोनों मिल करके संगम का निर्माण करते हैं। संगम जहां द्वादश माधव की रखवाली है। द्वादश माधव जिसमें त्रिवेणी माधव का कोई विग्रह नहीं है। त्रिवेणी गंगा यमुना के ऊपर जमुना गंगा के ऊपर जो छलांग लगाती है उसमें एक वेणी का निर्माण होता है। वही वेणी ही वेणी माधव हैं। उस वेणी माधव तरंग में आचमन करने से स्नान करने से भगवत अविनाशी मोक्ष (सायुज्य), सालोक्य के सामीप्य और शास्त्र गति प्राप्त होती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Magh Mela: Kalpvas: Maghe Masi Prayage Tu Vaas: Kalpasmo Bhavet, there is a rule to stay regularly on the bank
माघ मेले में पहुंच रहे कल्पवासी। - फोटो : अमर उजाला।

राजा हर्ष ने किया था कल्पवास

संगम तट पर राजा हर्ष ने एक मास निवास करके अपनी भगनी के व्रत पारायण धर्म के निर्वहन के लिए एक समय भोजन करके कल्पवास किया था। तब से शाश्वत कल्पवास की व्यवस्था प्राणि मात्र के लिए है। इसमें ब्राह्मण,क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र आदि वर्ण समामनाय मिल करके सभी एक हो करके यहां गंगा में सूर्योदय के पहले स्नान करके जब करके दान करके सत्संग करके अपने जीवन को पावन बनाते हैं इसी का नाम कल्पवास है।

विज्ञापन
Magh Mela: Kalpvas: Maghe Masi Prayage Tu Vaas: Kalpasmo Bhavet, there is a rule to stay regularly on the bank
माघ मेले में भ्रमण करते साधु-संत। - फोटो : अमर उजाला।

माघ मेला का प्रथम स्नान कल

माघ मेले का शुभारंभ पौष पूर्णिमा स्नान के साथ शनिवार से हो रहा है। हालांकि, इससे पहले ही नए वर्ष की भीड़ ने मेला क्षेत्र की व्यवस्थाओं की परीक्षा ले ली। संगम और अन्य स्नान घाटों की स्थिति भी चिंता का विषय है। गंगा नदी के तेज प्रवाह के कारण कई घाटों की चौड़ाई कम हो गई है जिससे स्नानार्थियों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। इसी को देखते हुए मंडलायुक्त ने बृहस्पतिवार को मेला क्षेत्र का निरीक्षण कर घाटों की चौड़ाई बढ़ाने और उन्हें अधिक सुरक्षित करने के निर्देश दिए।

भारी संख्या में श्रद्धालुओं और कल्पवासियों के आगमन से संगम मार्ग, काली सड़क सहित प्रमुख रास्तों पर भीषण जाम की स्थिति बन गई जिससे कल्पवासियों को घंटों परेशान होना पड़ा। मेला प्रशासन के अनुसार बृहस्पतिवार को करीब पांच लाख कल्पवासी मेला क्षेत्र पहुंचे। सुबह से ही श्रद्धालु ट्रैक्टर-ट्रॉली, पिकअप और निजी वाहनों पर सामान लादकर संगम क्षेत्र की ओर बढ़ते रहे। देर शाम तक यही स्थिति रही जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed