नागरिकता कानून संशोधन कानून को लेकर पिछले तीन दिनों से हिंसा की आग में सुलग रही दिल्ली के उसी इलाके से आपसी भाईचारे और मानवता की रक्षा करने वाली भी एक अच्छी खबर भी निकलकर आई है। दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके में हिंसा के बीच अपने घर में अकेली फंसी हिन्दू महिला की जान सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे झूंसी के युवा सोशलिस्ट मोहम्मद अनस ने सोशल मीडिया फेसबुक के जरिए बचा ली।
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फेसबुक पर अनस की अपील पर दिल्ली में रहने वाले उसके एक दर्जन मुसलिम दोस्त मौके पर पहुंचे और हिन्दू महिला को उसके घर से पूरी तरह महफूज हालत में निकाल लाए। बुधवार को महिला को सकुशल उसके घर पहुंचा दिया गया।
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सोमवार को ईस्ट दिल्ली में हिंसा अपने चरम पर थी। घर, दुकान और मकानों में आग लगाई जा रही थी। हिंसा के बीच मुस्तफाबाद इलाके में बुजुर्ग हिन्दू महिला मंजू सारस्वत अपने घर में अकेली फंस गई। उस वक्त उनके पति, बेटा और बेटी घर पर मौजूद नहीं थे। जब उनके पड़ोसी के घर को आग के हवाले किया गया तो मंजू ने यह मान लिया था कि अब उनकी भी जान नहीं बचने वाली है।
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नागरिकता कानून
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मंजू ने फोन पर बेटे को पूरी बात बताई। इसी बीच बेटे का संपर्क सैकड़ों किलोमीटर दूर झूंसी में बैठे उसके मुसलिम दोस्त मोहम्मद अनस से हो गया। अनस का भी दिल्ली में मकान है। साथ ही लगातार सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहने के कारण अक्सर उनका दिल्ली आना-जाना होता है। अनस ने तत्काल दिल्ली में रहने वाले अपने मुसलिम दोस्तों के साथ के साथ ही फेसबुक पर वॉल लिखकर हिंसा में फंसी बुजुर्ग महिला मंजू के मदद की अपील की। अनस लिखा कि मुस्तफाबाद में रहने वाले मेरे जो दोस्त इस पोस्ट को पढ़ रहे हैं।
वो तत्काल मंजू आंटी की मदद करें। अनस के फेसबुक वॉल को देखते ही उसके मुसलिम दोस्त सक्रिय हुए और हिंसाग्रस्त क्षेत्र मुस्तफाबाद पहुंचे। भारी मशक्कत के बाद मंजू को सुरक्षित उनके घर से निकाला गया। हिंसा शांत होने तक मंजू सारस्वत झूंसी निवासी मोहम्मद अनस के दोस्त मोमिन सैफी के घर पर रहीं। अनस के पहल से हिन्दू महिला की जान बचने की सोशल मीडिया पर खूब तारीफ हो रही है। अनस का कहना है कि नफरत से किसी का भला नहीं होने वाला है। आपसी प्रेम और भाईचारे से ही दोनों समुदाय तथा देश का भला होगा।