दिल्ली की जमात से लौटे इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के प्रोफेसर का मामला केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय तक पहुंच गया है। इविवि प्रशासन के अफसरों ने मंत्रालय को इस पूरे मामले से अवगत करा दिया है और अब उनकी नजर अब प्रोफेसर की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।
जमात से लौटे इलाहाबाद विवि प्रोफेसर का मामला पहुंचा एचआरडी मंत्रालय
प्रोफेसर ने दिल्ली से लौटने के बाद कला संकाय के इस प्रोफेसर ने 17 मार्च को अपने ही विभाग में वार्षिक परीक्षा के दौरान सेंटर सुप्रीटेंडेंट के रूप में ड्यूटी की थी। इस दौरान वह सैकड़ों छात्रों के संपर्क में आए। विभाग में कई शिक्षकों और कर्मचारियों से भी उनकी मुलाकात हुई।
होली की छुट्टी के बाद विश्वविद्यालय खुलने पर वह 17 मार्च तक कब-कब विश्वविद्यालय आए और किनसे मुलाकात की, इविवि प्रशासन अब यह आंकड़ा भी जुटाने में लगा है। इसके अलावा प्रोफेसर के कई शोधार्थी भी उनसे नियमित रूप से संपर्क में रहे होंगे। उनकी जानकारी भी जुटाई जा रही है। अगर जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो इविवि प्रशासन के लिए चुनौती बढ़ जाएगी और इन परिस्थितियों में प्रोफेसर के विभाग को भी सेनिटाइज किया जाएगा।
इविवि प्रशासन को प्रोफेसर के खिलाफ दर्ज एफआईआर की कॉपी अभी नहीं मिली है, लेकिन विश्वविद्यालय अपने स्तर से यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि प्रोफेसर दिल्ली कब गए और वहां से कब लौटे। इसके बाद कितनी बार विश्वविद्यालय जाए और किन लोगों से मुलाकात की।
इविवि के पीआरओ डॉ. शैलेंद्र कुमार मिश्र ने कुलपति की ओर तरफ से बताया कि रिपोर्ट निगेटिव आए या पॉजिटिव, लेकिन प्रोफेसर को नोटिस जारी किया जाएगा। प्रशासन की बार-बार अपील के बाद भी उन्होंने जमात से लौटने की बात छिपाकर रखी। एक शिक्षक होने के नाते उन्हें खुद आगे आकर नजीर पेश करनी चाहिए थी। फिलहाल वह क्वारंटीन में हैं। उनके लौटने के बाद नोटिस जारी किया जाएगा और उनके खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई भी होगी।
प्रोफेसर के संक्रमित होने की कम है आशंका
प्रोफेसर कोरोना वायरस से संक्रमित हैं या नहीं, यह तो जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा लेकिन उन्हें दिल्ली से लौटे तकरीबन एक माह बीत चुके हैं और अब तक संक्रमण के कोई लक्षण नजर नहीं आए हैं। ऐसे में उनके संक्रमित होने की आशंका कम है। इविवि के शिक्षकों के बीच यही चर्चा है लेकिन शिक्षकों में इस बात को लेकर नाराजगी भी है कि प्रोफेसर ने सच्चाई क्यों छिपाई।