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हाईकोर्ट इलाहाबाद ने पूछा, लोधी यूपी के पिछड़ा वर्ग में शामिल हैं या नहीं

Wed, 26 Feb 2020 08:53 PM IST
विनोद सिंह न्यूज नेटवर्क, प्रयागराज
न्यूज नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 26 Feb 2020 08:53 PM IST
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High Court Allahabad asked, whether Lodhi is included in backward class of UP or not
court - फोटो : court

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या लोधी जाति उत्तर प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग में अधिसूचित है अथवा नहीं। कोर्ट ने इस मामले में सरकार को 10 दिन के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। 2018 की पुलिस भर्ती के अभ्यर्थी सचिन कुमार राजपूत की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति शमीम अहमद ने दिया।



 याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह के मुताबिक याची ने 2018 की कांस्टेबल भर्ती के लिए आवेदन किया था। लिखित परीक्षा में सफल होने के बाद उसे दस्तावेजों के सत्यापन के लिए बुलाया गया। याची ने केंद्र सरकार द्वारा जारी पिछड़ा वर्ग का प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया, जिसे भर्ती बोर्ड ने मानने से इंकार कर दिया। इसके खिलाफ याचिका दाखिल की गई।

High Court Allahabad asked, whether Lodhi is included in backward class of UP or not
jammu high court - फोटो : अमर उजाला

कहा गया कि विज्ञापन यह प्रावधान था कि जाति प्रमाणपत्र निर्धारित कट ऑफ डेट एक अप्रैल 2018 या आवेदन की अंतिम तिथि आठ दिसंबर 2018 के बीच का होना चाहिए। याची के पास इस अवधि का केंद्र सरकार द्वारा जारी ओबीसी प्रमाणपत्र है, जिसे उसने प्रस्तुत किया। उपरोक्त तिथि पर उसके पास यही प्रमाणपत्र उपलब्ध था और राज्य सरकार द्वारा जारी प्रमाणपत्र कट ऑफ डेट के बाद का था। पुलिस भर्ती बोर्ड ने प्रमाणपत्र को मानने से इंकार कर दिया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

High Court Allahabad asked, whether Lodhi is included in backward class of UP or not
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
अधिवक्ता का कहना था कि गौरव कुमार शर्मा केस में हाईकोर्ट की फुलबेंच ने निर्णय दिया है के केंद्र सरकार का जातिप्रमाण पत्र राज्य सरकार की नौकरियों में तभी मान्य होगा, जब यह साबित कर दिया जाए कि जिस जाति का प्रमाणपत्र है, वह जाति उत्तर प्रदेश राज्य में भी पिछड़ा वर्ग में अधिसूचित है। अधिवक्ता का कहना था कि याची लोधी जाति का है, जो केंद्र सरकार के अलावा राज्य में भी अन्य पिछड़ा वर्ग में अधिसूचित है। इसके बावजूद पुलिस भर्ती बोर्ड में याची के प्रमाणपत्र को मानने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को 10 दिन में जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
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