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तस्वीरें: मासूमों को मारते वक्त नहीं कांपे दरिंदों के हाथ, पांच शवों को देख चीत्कार से गूंजा गांव
Mon, 06 Jan 2020 10:06 AM IST
शाहरुख खान
ब्यूरो, अमर उजाला, प्रयागराज
ब्यूरो, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 06 Jan 2020 10:06 AM IST
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murder in prayagraj
- फोटो : अमर उजाला
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प्रयागराज के सोरांव के यूसुफपुर में हुए हत्याकांड के बाद वहां दिनभर चीख-पुकार मची रही। घटना के बाद विजयशंकर के परिवार से तो वहां कोई मौजूद नहीं था। लेकिन उसकी बहू कामिनी के पक्ष से जुटे लोग लगातार बिलखते रहे। मासूम भांजों व बहन को याद कर कार्र्तिकेय फूट-फूटकर रोता रहा। उधर घर की कई महिलाएं भी शवों को देख बेसुध हो गईं। बाद में किसी तरह उन्हें होश में लाया गया लेकिन उनकी आंखों से लगातार आंसू बहते रहे।
murder in prayagraj
- फोटो : अमर उजाला
यूसूफपुर गांव में रहने वाले विजयशंकर ने कई साल पहले यहां मकान बनवाया था। करीब पांच साल पहले उन्होंने बड़े बेटे सोनू का विवाह प्रतापगढ़ के लालगंज थाना स्थित मुल्तानीपुर, लीलापुर के रहने वाले सोमदत्त तिवारी की बेटी कामिनी से किया था। एक भाई व एक बहन में बड़ी कामिनी का परिवार मौजूदा समय में प्रतापगढ़ के अचलपुर में रहता है।
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सूचना पर सबसे पहले उसका भाई कार्तिकेय उर्फ शानू मौके पर पहुंचा। बहन व मासूम भांजों के शव देख वह एकबारगी तो बदहवास सा हो गया। पुलिसकर्मियों ने उसे संभाला तो वह फूट-फूटकर रोने लगा। उधर घटना की जानकारी मिलने पर कामिनी के परिवार के अन्य लोगों का भी पहुंचना शुरू हुआ। उसके चचेरे भाई के साथ ही फूफा व अन्य लोग भी आए, जिनमें कई महिलाएं भी शामिल थीं। इनमें से कुछ तो दरवाजे तक पहुंचते-पहुंचते बेसुध भी हो गईं। किसी तरह उन्हें होश में लाया गया, लेकिन इसके बावजूद उनका रुदन क्रंदन नहीं थमा। परिवारवालों की हालत देख वहां मौजूद ग्रामीणों की भी आंखें नम हो र्गईं। कुछ महिलाएं तो शवों के पास ही बैठकर लगातार बिलखती रहीं।
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- फोटो : अमर उजाला
उधर घटना को लेकर ग्रामीण भी स्तब्ध थे। वह आपस में यह चर्चा करते रहे कि आखिर कैसे कोई ऐसी वारदात को अंजाम दे सकता है। मौके पर जुटे ग्रामीणों व परिवारवालों ने बताया कि सोनू भी पहले सूरत में ही अपनी बीवी बच्चों के साथ रहकर काम करता था। दो साल पहले उसकी मां की मौत हुई जिसके बाद पिता अकेले हो गए। इस पर करीब साल भर पहले वह परिवार लेकर गांव चला आया।
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मौके पर जमा भीड़
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छह महीने पहले उसने लोन लेकर ऑटो खरीदा और फिर इसे चलाकर अपना और अपने परिवार का पालन पोषण करने लगा। ग्रामीणों का कहना था कि सोनू काफी मिलनसार स्वाभाव का था। ऐसे में किसी को समझ नहीं आ रहा है कि आखिर कौन सी दुश्मनी रही जिसे लेकर न सिर्फ उसे बल्कि उसके पूरे परिवार को खत्म कर दिया गया। ग्रामीण यह भी चर्चा करते सुने गए कि आखिर मासूमों को मारते वक्त कैसे हत्यारों के हाथ नहीं कांपे?