कार्तिक पूर्णिमा की शाम गंगा, यमुना, विलुप्त सरस्वती केसंगम तट पर दीपोत्सव की आभा से जगमग हुई तो कुछ देर के लिए लगा जैसे नभ का तारामंडल ही धरा पर उतर आया हो। पावन त्रिवेणी के तट पर गंगा-यमुना की वेणी में यूं ही असंख्य दीपों के चंद्रहार गुंथते गए और पूनम का खिलखिलाता चांद उस जगमग ज्योति की ओट में शरमाता सा नजर आता रहा।
दिव्य देव दीपावलीः संगम पर दीपोत्सव की आभा से शरमाया पूनम का चांद
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सांझ ढलने से पहले ही लोग घरों से दीया-बाती लेकर संगम की ओर पहुंचने लगे। स्कूलों के छात्र, छात्राओं ने भी दीपमालाएं सजाईं और एनसीसी के कैडेट्स ने भी रंगोलियों से तट को भव्यता प्रदान करने की कोशिश की। बच्चों ने भी अपनी परिकल्पनाओं से दीपों के स्वास्तिक रचे तो महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं। महिलाओं ने संगम पर एक ओर हल्दी-चंदन के टीके लगाकर शुभ के गीत भी गाए और दीप भी जलाती रहीं।
दीपोत्सव का यह दृश्य हर किसी के मनोभावों में रचा बसा नजर आया। किसी ने रेती पर दीपों की लड़ियों से भारत का नक्शा बनाया तो किसी ने स्वच्छता अभियान का संदेश दिया। कहीं कमल के पुुष्पों के आकार में दीप जले तो कहीं कलश के रूप में। लोगों के साथ पुलिस के जवान और अफसर भी दीपोत्सव का हिस्सा बने।
कतारबद्ध दीपों, अल्पनाओं, रंगोलियों से कार्तिक पूर्णिमा की छटा इसी तरह निखरती रही। कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए लोग मास्क लगाकर दीपोत्सव में शामिल हुए। संगम तट से लेकर शहर के तिराहों, चौराहों तक को दीपमालाओं से सजाया गया। भवनों पर भी दीप जलाए गए और झालरों से भी सजावट की गई। खास तौर से यमुना पार अरैल में त्रिवेणी पुष्प परिसर को सतरंगी झालरों से सजाकर दीपोत्सव के रंग बिखेरे गए। इसी तरह झूंसी में भी गंगा तट पर लोगों ने दीप जलाए गए। गंगा, यमुना के दोनों तटों पर दीपों की लड़ियां सजाई गईं। साथ ही शहर के तीर्थों, भवनों को और मंदिरों को भी सजाया गया।
अफसरों ने उतारी आरती, किया दीपदान
प्रयागराज। कार्तिक पूर्णिमा पर दीपोत्सव के दौरान प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से भव्य महाआरती की गई। संगम महाआरती समिति के 11 पुरोहितों ने धूप, कपूर और गुगुल दशांग से त्रिवेणी की आरती उतारी। इस दौरान आईजी केपी सिंह, डीएम भानुचंद्र गोस्वामी, एसएसपी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी, प्रभारी मेलाधिकारी विवेक चतुर्वेदी समेत कई अधिकारियों ने भी आरती के बाद दीपदान किया।
संगम में कार्तिक पूर्णिमा की डुबकी लगाने के लिए भोर में ही श्रद्धालु पहुंचने लगे। ठंड केबावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने स्नान किया। इस दौरान त्रिवेणी संगम पर जगह-जगह महिलाएं टीके लगाकर अर्घ्य देती रहीं और अनुष्ठान किया जाता रहा। तीर्थपुरोहितों की चौकियां दीपदान की वजह से संगम से सौ मीटर दूर करा दी गई थीं। स्नान के बात लोग पुरोहितों की चौकियों पर मनौतियों के संकल्प करते रहे।