लाखड़ी गुजरात से आए मावा भाई, मंगना भाई और धर्मा भाई पेशे से किसान हैं। शाही स्नान मार्ग पर तीनों सुबह चार बजे से हाथ जोड़े खड़े थे। 60 से 62 वर्ष आयु के ये तीनों किसान दोपहर दो बजे तक ऐसे ही खड़े रहे।
आस्था और विश्वास में डूबे इन किसानों का कहना था कि वे देव दर्शन को यहां आए हैं। उनके साथ गुजरात से डेढ़ हजार लोगों की टोली यहां पहुंची हैं। शाही स्नान देखने के लिए दूसरे राज्यों से आईं किसानों, व्यापारियों की ऐसी सैकड़ों टोलियों की लंबी कतार लगी रही।
मावा, मंगना और धर्मा तीनों ही मामूली किसान हैं। खेती-किसानी और पशुपालन से इतना मिल जाता है कि घर का खर्च चल जाए। पूछने पर बताया कि प्रयागराज चले तो आए लेकिन, यहां ठहरने का कोई इंतजाम नहीं था। एक अखाड़े में जगह मिल गई। अब वहां दिन और रात का भोजन भी मिल जाता है। हालांकि तीनों व्यवस्था से संतुष्ट नजर नहीं आए। बोले, वे तो शाही स्नान देखने यहां आए थे लेकिन स्नान के दौरान आम लोग भी इसमें शामिल हो गए और भगदड़ जैसी स्थिति रही।
बातचीत के दौरान साधु-संतों और श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से हुई फूलों की बारिश के कुछ छींटे गुजरात से आए इन किसानों पर भी पड़े और इससे अभिभूत धर्मा भाई बीच में ही बोल पड़े, ‘बाकी व्यवस्था मोदी जी ने बहुत अच्छी की है।’
भुसाल महाराष्ट्र से आईं सरोज पंडित, शकुंतला विष्णु, सविता शंकर, शंकर देवराज को निर्वाणी अखाड़े के साथ शाही स्नान में शामिल होने का मौका मिल गया। यह परिवार अखाड़े के शिविर में ही ठहरा है। इनमें सरोज पंडित पिछले कुंभ 2013 में भी यहां आईं थीं। बोलीं कि इस बार शाही स्नान के दौरान काफी आपाधापी रही और शाही स्नान में आम लोगों के शामिल हो जाने से घाट पर धक्कामुक्की भी हुई जबकि पिछली बार ऐसा नहीं था। जहां तक अन्य व्यवस्थाओं की बात है तो इस बार स्थिति बेहतर है। खासतौर पर हेलीकॉप्टर से हुई फूलों की बारिश रही, जो पिछली बार नहीं थी।