कोरोना वायरस से बचाव के मद्देनजर जारी लॉकडाउन की वजह से पशुपालकों और डेयरी संचालकों के सामने घोर संकट खड़ा हो गया है। दूध जरूरी वस्तुओं की सूची में सबसे ऊपर है लेकिन इसका उत्पादन करने वालों के सामने परिवार पालने की समस्या आ गई है। दुग्ध की मांग कम हो गई है।
CoronaVirus: प्रयागराज में डेयरियां बंद होने के कगार पर, रोग के डर से लोग नहीं ले रहे दूध
झूंसी का बदौरा सोनौटी गांव दुग्ध आपूर्ति का हब माना जाता है। गांव के जंगीलाल का कहना है कि लेकिन इन दिनों धंधा बंद हैं। कालाबाजारी जरूर शुरू हो गई है कि लेकिन पशुपालक लाचार हैं। धरम सिंह यादव का कहना है कि पुलिस जगह-जगह रोक रही है। इसलिए वे दूध शहर नहीं ले जा रहे। उनका कहना है कि डेयरी पर तो अब भी 50 रुपये प्रति लीटर दूध लिया जा रहा है लेकिन बहुत कम। सोरांव में डीहा गांव के जंगबहादुर यादव का कहना है कि दूध की मांग कम हो गई है। डेयरी वाले दूध नहीं ले रहे।
इसलिए खोवा बनाने का निर्णय लिया गया लेकिन उसकी भी खपत नहीं है। स्थिति यह है कि प्रति किग्रा 60 से 70 रुपये में खोवा बिक रहा है। जबकि, सामान्य दिनों में 150 से 170 रुपये प्रति किग्रा बिकता था। भावापुर के रामबिंद पटेल का कहना है कि एक टाइम के दूध की दही जमाई जा रही है। ताकि, इससे घी बनाया जा सके लेकिन यह बहुत कठिन है। मेजा के अमीलिया कला में डेयरी है लेकिन दूध की मांग नहीं होने की वजह से वह बंद है।
गांव के अरुण तिवारी के यहां रोजाना 50 से 60 लीटर दूध का उत्पादन होता है। उनका कहना है कि डेयरी बंद हो जाने से दूध बेकार हो जा रहा है। उनका कहना है कि पहले तो कोशिश की गई कि घी बनाया जाए लेकिन यह आसान नहीं है। मेजा में ही नीबी गांव के हौसला मिश्रा के पास दो दर्जन गाय और भैंस हैं। उनके दूध की शहर में आपूर्ति होती है लेकिन अब बंद है। उनका कहना है कि कोरोना के डर की वजह से लोग गांव में भी दूध नहीं ले रहे। इससे दूध खराब हो रहा है। इस तरह की समस्या पूरे जिले में पशुपालकों और डेयरी संचालकों के सामने है।
दोहरी मार, चारा हुआ महंगा
पशुपालकों को दोहरी मार पड़ रही है। दूध की मांग कम हो गई है लेकिन चारा की कालाबाजारी शुरू हो गई है। झूंसी के हेता पट्टी में पहले चोकर की 50 किग्रा की बोरी 895 रुपये में मिल जाती थी लेकिन अब इसकी कीमत 1300 से 1400 वसूली जा रही है। इसी तरह की शिकायत सोरांव के पशुपालकों की भी रही।
चारे के वाहनों को न रोके प्रशासन
सपा नेता एमएलसी बासुदेव यादव, निवर्तमान महानगर अध्यक्ष सै.इफ्तेखार हुसैन ने भूसे के वाहनों को न रोके जाने की मांग की है। उन्होंने डीएम को पत्र भी लिखा है। नेताओं का कहना है कि वाहनों के रोके जाने से पशुपालकों के सामने चारा का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने ग्रामीण इलाकों में दूधियों को भी रोके जाने की शिकायत की है। उनका कहना है कि पशुओं को चारा नहीं मिलने तथा दूधियों को रोके जाने से दूध की आपूर्ति प्रभावित हो जाएगी। जिला प्रवक्ता दान बहादुर मधुर ने शहरों में फंसे मजदूरों, रेहड़ी वालोें को जांच के बाद घर भेजने की व्यवस्था किए जाने की मांग की है।