‘कुछ इलाहाबाद में सामां नहीं बहबूद के, यां धरा क्या है ब-जुज़ अकबर के और अमरूद के’ कहने वाले नामवर शायर अकबर इलाहाबादी को क्या मालूम था कि जो शहर कभी उनके नाम से जाना जाता था, जिसकी चिट्ठियों में पते की जगह सिर्फ अकबर इलाहाबादी लिखा होता था, उसके इस दुनिया से रुखसत होने के बाद कोई निशानी बाकी नहीं रहेगी। 16 नवंबर 1846 को इलाहाबाद में पैदा हुए अकबर अदालत में एक छोटे मुलाजिम थे, लेकिन बाद में कानून का अच्छा ज्ञान प्राप्त करने के बाद वह सेशन जज बने और इसी पद से रिटायर हुए। तकरीबन 75 बरस की उम्र में इलाहाबाद में ही 9 सितंबर, 1921 को उन्होंने इस फानी दुनिया को अलविदा कह दिया। उन्हें रुखसत हुए पूरे सौ बरस बीत गए लेकिन उनकी शायरी और शख्सियत आज भी उसी तरह बुलंद है।
100वीं पुण्यतिथि : वारिसों का नामोनिशां नहीं, अपने ही शहर में बेगाने हुए अकबर इलाहाबादी
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 09 Sep 2021 12:00 PM IST
सार
तकरीबन 75 बरस की उम्र में इलाहाबाद में ही 9 सितंबर, 1921 को उन्होंने इस फानी दुनिया को अलविदा कह दिया। उन्हें रुखसत हुए पूरे सौ बरस बीत गए लेकिन उनकी शायरी और श्रिख्सयत आज भी उसी तरह बुलंद है।
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