दुनियाभर के सैलानियों में ताजमहल के लिए दीवानगी है, लेकिन आगरा में 65 से ज्यादा ऐसे स्थल हैं, जो ऐतिहासिकता, प्राकृतिक खूबसूरती और रहस्य-रोमांच का संगम हैं। इनमें चंबल की खूबसूरत वादियां, अटेर के किले का रहस्य-रोमांच और बटेश्वर के 101 मंदिरों का आचमन कर बहती यमुना का नजारा सैलानियों को आश्चर्य चकित करता है। अधिकांश स्थल गुमनाम हैं। पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि ऐसे गुमनाम स्मारकों को सहेजकर और इनके बारे में बताकर पर्यटकों को आगरा में कई दिन तक रोका जा सकता है। इनके प्रचार-प्रसार के लिए सरकार को विभिन्न तरह के उपाय करने होंगे।
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चंबल की खूबसूरत तस्वीरें
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चंबल सेंचुरी : 1979 से चंबल सेंक्चुरी में घड़ियाल, मगरमच्छ और डॉल्फिन का संरक्षण हो रहा है। कछुओं के साथ इनकी जलक्रीड़ा, नदी में इंडियन स्कीमर, पेंटेड स्टार्क, रूडी शेल्डक, व्हिसलिंग टील, बार हेडेड गूज, फ्लेमिंगो आदि पक्षियों का कलरव पर्यटकों को लुभाता है। बीहड़ में कुलांचे भरते काले और चितकबरे हिरन मन मोह लेते हैं। चंबल सफारी जरार के निदेशक आरपी सिंह ने बताया कि चंबल में ईको टूरिज्म को बढ़ावा मिलने से यहां पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
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अटेर का किला
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अटेर का किला: अटेर किले का निर्माण कार्य 1644 में तत्कालीन भदावर नरेश बदन सिंह ने कराया था। किले में 17 बुर्ज और चार प्रवेश द्वार हैं। रहस्य रोमांच से भरा सात मंजिला किला यहां आने वाले पर्यटकों को भी आश्चर्यचकित कर देता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किले को पुरातत्व विभाग सजाने संवारने में जुटा है। बाह के नंदगवां घाट पर आने वाले सैलानी चंबल नदी के अटेर घाट पर पुल न होने से किले तक नहीं पहुंच पाते है। अगले साल बनकर तैयार होने वाले पुल के साथ ही पर्यटक नंदगवां से किले तक कैमिल सफारी का लुत्फ उठा सकेंगे।
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बटेश्वर में यमुना किनारे स्थित मंदिर
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बटेश्वर के मंदिर: महाभारतकालीन नगरी बटेश्वर में भदावर नरेश बदन सिंह ने 1646 में एक कोस लंबा अर्द्धचंद्राकार बांध बनवा कर यमुना के बहाव को मोड़ा था। इसी बांध पर 101 शिवमंदिर शृंखला स्थित है। मंदिर के इतिहास से लेकर यहां लगने वाले ऊंट और घोड़ों का मेला भी विदेशी पर्यटकों को बटेश्वर खींचकर ले आता है। यहां पर बना यूपी ट्यूरिज्म का पर्यटन गृह संरक्षित हो तो आने वाले पर्यटकों का ठहराव भी बढ़ सकेगा।
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चंबल नदी में घड़ियाल
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चंबल सेंचुरी बाह के रेंजर आरके सिंह राठौर ने कहा कि अटेर का पुल बनने से चंबल ईको टूरिज्म का हब बनेगी। चंबल में नौकायन कर जलीय जीव और चिड़ियों को देखने वाले पर्यटक अटेर किले के रहस्य रोमांच से परिचित हो सकेंगे। ताजमहल और लायन सफारी के बीच बाह में पर्यटन बढ़ने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।