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विश्व गौरैया दिवसः गौरैया की चीं-चीं से चहक रही चंबल, रंग ला रही ग्रामीणों व वन विभाग की मुहिम

Fri, 20 Mar 2020 02:59 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Fri, 20 Mar 2020 02:59 PM IST
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World Sparrow Day Sparrow in Chambal
गौरैया - फोटो : अमर उजाला
दुनिया के 50 देशों में लुप्तप्राय स्थिति में पहुंची गौरैया चंबल की वादियों में खूब चहक रही हैं। इनके उड़ते झुंड और फुदकना देखकर देसी-विदेशी सैलानी भी मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। लोग मानते हैं कि प्राकृतिक आवास नष्ट होने से शहर ही नहीं गांव के घर आंगन में भी गौरैया कम दिखने लगी थी।
World Sparrow Day Sparrow in Chambal
गौरैया के घरौंदे - फोटो : अमर उजाला
दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में कम होती जा रही गौरैया चंबल की वादियों में खूब फुदकती दिख रही हैं। ऐसा चार साल से वन विभाग की ओर से चंबल में इनके संरक्षण को लेकर जारी अभियान से है। यहां लगातार गौरैया के लिए घरौंदे देकर ग्रामीणों को प्रेरित किया जा रहा है। यही कारण है कि चंबल में राजस्थान से सटे रेहा से लेकर इटावा से लगे उदयपुर खुर्द तक बड़ी तादात में गौरैया दिख रही हैं। पेडों पर भी इनके घोंसले देखने वालों के लिए सुखद अनुभव है। कमोवेश यही स्थिति मध्यप्रदेश और राजस्थान के चंबल के इलाके में भी है।                             
World Sparrow Day Sparrow in Chambal
गौरैया चंबल की वादियों में खूब फुदकती दिख रही - फोटो : अमर उजाला
चंबल में ग्रामीण भी जागरूकता के बाद से इनके घोंसले और पानी अपने घर की छत पर रखने लगे हैं। बताया कि विभिन्न सर्वे में केरल, गुजरात और दक्षिण के अन्य राज्यों में 60 से 80 फीसदी तक गौरैया कम हुई हैं। जबकि यूपी में यह आंकड़ा महज 40 फीसदी है। - आरके सिंह राठौड, रेंजर , चंबल सेंक्च्युरी बाह

2008 से शुरू हुई संरक्षण की मुहिम
नासिक के रहने वाले मोहम्मद ई दिलावर बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी से हैं। संकट में पड़ी गौरैया के संरक्षण की मुहिम उन्होंने ही 2008 में शुरू की थी। उन्होंने गौरैया के संरक्षण के लिए लकड़ी के बुरादे के छोटे घर बनाए, खाने-पीने का इंतजाम किया। उनकी मुहिम अब तक 50 देशों तक पहुंच चुकी है।                                                                      
                                                
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चिड़िया - फोटो : अमर उजाला
चिड़ा और चिड़िया की पहचान: नर गौरैया के सिर का ऊपरी भाग और नीचे का भाग भूरे रंग का होता है। गला चोंच और आँखों पर काला रंग होता है और पैर भूरे होते है। मादा के सिर और गले पर भूरा रंग नहीं होता है। नर गौरैया को चिड़ा और मादा चिड़ी भी कहते हैं।                    
                                                
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चंबल की वादियां में चहक रही गौरैया - फोटो : अमर उजाला
जैतपुर के साहित्यकार डॉ. वीपी मिश्र के घर आंगन और बगीचे में कई गौरैया एक साथ फुदकती हुई देखी जा सकती है। घर आंगन की शोभा बनी गौरैया उनके प्रयासों का नतीजा है। डॉ. वीपी मिश्र ने कविता के जरिए भी अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं। ...गौरैया खुश हो रही देख नए आवास, हवादार सुंदर मिला आंगन में भव्य प्रवास। उन्होने बताया कि करीब 7 साल पहले अपने आंगन में पौधे लगाने के साथ ही गौरैया के लिए घोंसले बनाए थे। अब तो आंख खुलते ही उनके लिए दाने पानी का इंतजाम करते है।

गौरैया: एक नजर
गौरैया की लंबाई 14 से 16 सेमी, वजन 25 से 35 ग्राम, प्रजनन मार्च से जून, एक बार में देती हैं 3 से 5 अंडे, 10 से 14 दिन में अंडों से निकलते हैं चूजे। 15 से 17 दिन में उड़ान भरने लगते हैं।                                              
                
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