सावन के चारों सोमवार भोलेनाथ पर इंद्रदेव ने जलाभिषेक नहीं किया। न केवल सोमवार बल्कि पूरे सावन के महीने ही आगरा समेत पूरा ब्रज बारिश के लिए तरसता रहा। आगरा समेत सभी पड़ोसी जिलों में सामान्य से आधी बारिश भी नहीं हुई। पांच सालों में यह पहला मौका है जब सबसे कम बारिश सावन के महीने में हुई है। 27 जून को दस्तक देने के बाद से ही मानसून की चाल कमजोर रही।
ब्रज में सूखा बीत रहा सावन, पांच वर्षों में इस बार सबसे कम बारिश, जानिए क्या है कारण
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कान्हा के ब्रज में पूरा सावन सूखा बीत रहा है। अब तक चारों सोमवार सूखे निकल गए। चौथे सोमवार तो मई-जून सी तेज गर्मी ने बेहाल कर दिया। केवल आगरा और मथुरा ही नहीं बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 33 में से 27 जिलों में बारिश सामान्य से आधी से भी कम है। उधर, पूर्वी उत्तर प्रदेश में झमाझम बारिश हो रही है। वहां 42 में से 8 जिलों में ही सामान्य से कम बारिश हुई बाकी 34 जिलों में बारिश खूब हुई।
जुलाई की बारिश तोड़ती थी रिकॉर्ड
पांच साल में आगरा-मथुरा में यह पहला मौका है जब मानसून के पहले महीने जुलाई में बारिश आधी से भी कम रही है। मथुरा में एक तिहाई बारिश ही हो सकी। बीते साल 2019 की जुलाई में आगरा में जहां 576.8 मिमी बारिश हुई तो 2018 की जुलाई में 453 मिमी बारिश हुई थी। 2016 में भी 535 मिमी बारिश ने आगरा और पड़ोसी जिलों को खूब भिगोया था। इस साल जुलाई के पूरे महीने में आगरा में महज 106 मिलीमीटर बारिश ही हो पाई। जबकि 2 साल पहले 2018 में सिर्फ एक दिन ही 27 जुलाई को 135 मिलीमीटर बारिश से आगरा तरबतर हो गया था।
| जिले | बारिश | कमी |
| आगरा | 106.3 मिमी | -52% |
| मथुरा | 70.6 मिमी | -67% |
| एटा | 109 मिमी | -45% |
| मैनपुरी | 156 मिमी | -40% |
| फिरोजाबाद | 178 मिमी | -25% |