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आगरा की पांच तस्वीरें: तीन पर गौर जरूर करें, खेतों में जल रही पराली, सड़कों पर धूल के गुबार; फिर भी हवा अच्छी
Fri, 15 Nov 2024 10:13 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 15 Nov 2024 10:13 AM IST
सार
आगरा के मलपुरा, ग्वालियर रोड, सीकरी रोड के खेतों में पराली जलने से धुंआ उठ रहा है। इतना ही नहीं जगदीशपुरा समेत जगह-जगह कचरा जलाया जा रहा है। इसके बाद सवाल ये उठता है कि एक्यूआई 149 आखिर कैसे?
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आगरा की हवा
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा शहर से देहात तक बृहस्पतिवार को स्मॉग की सफेद चादर छाई रही। शहर में ताजमहल के पास की सड़कों पर धूल के गुबार उठते रहे तो देहात में ग्वालियर रोड, जगनेर रोड, मलपुरा, फतेहपुर सीकरी रोड के खेतों में पराली जलाने से धुंआ उठता रहा, लेकिन कागजों में आगरा की हवा बेहतर रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 149 रहा, जबकि मौसम विज्ञानियों ने आगरा को घने स्मॉग के साए तले बताया।
सड़क पर धूल का गुबार
- फोटो : अमर उजाला
78 एमएलडी धांधूपुरा एसटीपी रोड पर जलनिगम निर्माण ग्रामीण इकाई ने सीवर लाइन के लिए खुदाई कराई थी। विश्वराज एनवायरमेंट ने यहां से मिट्टी नहीं हटाई। इस पर पानी का छिड़काव भी नहीं कराया। यहां धूल के गुबार उठ रहे हैं। इसी तरह जलनिगम शहरी इकाई के वेस्टर्न जोन सीवर प्रोजेक्ट में बोदला-लोहामंडी रोड पर सड़क की खुदाई के बाद धूल ही धूल उठ रही है। यहां से वाहनों के निकलने पर सांस लेना मुहाल हो जाता है।
जगदीशपुरा में जलता रहा कचरा
- फोटो : अमर उजाला
जगदीशपुरा में जलता रहा कचरा
बोदला-लोहामंडी रोड पर बैनारा फैक्टरी के पास खाली पड़े मैदान में जमा कचरे में आग लगा दी गई। बृहस्पतिवार को दोपहर से लेकर शाम तक यहां धुआं उठता रहा। यहां जगदीशपुरा, किशोरपुरा और आसपास की जूता इकाइयों की कतरनों का ढेर प्लास्टिक के बोरों में पड़ा हुआ था। इसके अलावा डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का कचरा भी यहीं एकत्र हो रहा है। इसी कचरे और कबाड़ के ढेर में आग लगने से धुएं के गुबार निकलते रहे।
बोदला-लोहामंडी रोड पर बैनारा फैक्टरी के पास खाली पड़े मैदान में जमा कचरे में आग लगा दी गई। बृहस्पतिवार को दोपहर से लेकर शाम तक यहां धुआं उठता रहा। यहां जगदीशपुरा, किशोरपुरा और आसपास की जूता इकाइयों की कतरनों का ढेर प्लास्टिक के बोरों में पड़ा हुआ था। इसके अलावा डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का कचरा भी यहीं एकत्र हो रहा है। इसी कचरे और कबाड़ के ढेर में आग लगने से धुएं के गुबार निकलते रहे।
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खेतों में जलाई जा रही पराली
- फोटो : अमर उजाला
खेतों में जलाई जा रही पराली
खेतों में रबी की फसल की बुवाई के दौर में किसान पराली जला रहे हैं। मलपुरा, धनौली, जगनेर रोड, फतेहपुर सीकरी रोड, ग्वालियर रोड के खेतों में पराली जलाए जाने के कारण धुएं के गुबार उठते रहे। खेतों की मेड़ के किनारे पराली जलाने से काले धुएं के गुबार जगह-जगह दिखते रहे। हालांकि कृषि विभाग की रिपोर्ट में पराली जलाने पर कोई जुर्माना नहीं किया गया।
खेतों में रबी की फसल की बुवाई के दौर में किसान पराली जला रहे हैं। मलपुरा, धनौली, जगनेर रोड, फतेहपुर सीकरी रोड, ग्वालियर रोड के खेतों में पराली जलाए जाने के कारण धुएं के गुबार उठते रहे। खेतों की मेड़ के किनारे पराली जलाने से काले धुएं के गुबार जगह-जगह दिखते रहे। हालांकि कृषि विभाग की रिपोर्ट में पराली जलाने पर कोई जुर्माना नहीं किया गया।
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प्रदूषण नियंत्रण के लिए नोटिस दिए
- फोटो : अमर उजाला
प्रदूषण नियंत्रण के लिए नोटिस दिए
यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. विश्वनाथ शर्मा ने बताया कि जलनिगम की शहरी और ग्रामीण इकाइयों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। मैंने सड़कों का निरीक्षण किया है, जिन पर धूल उठ रही है। इससे वायु गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। जलनिगम को नोटिस भेजकर उपाय करने के लिए कहा है। पूर्व में भी 37.50 लाख रुपये की पर्यावरण क्षतिपूर्ति जलनिगम पर लगाई गई थी।
यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. विश्वनाथ शर्मा ने बताया कि जलनिगम की शहरी और ग्रामीण इकाइयों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। मैंने सड़कों का निरीक्षण किया है, जिन पर धूल उठ रही है। इससे वायु गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। जलनिगम को नोटिस भेजकर उपाय करने के लिए कहा है। पूर्व में भी 37.50 लाख रुपये की पर्यावरण क्षतिपूर्ति जलनिगम पर लगाई गई थी।