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Firozabad: मुहम्मद गोरी ने तहस-नहस कर दिया था चंदरवाड़, पर छू न सका ये अतिशयकारी प्रतिमा, पढ़ें अद्भुत कहानी

Sat, 12 Nov 2022 05:18 PM IST
धीरेन्द्र सिंह दीपक जैन, फिरोजाबाद
दीपक जैन, फिरोजाबाद Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 12 Nov 2022 05:18 PM IST
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Story of the statue of Lord Chandraprabhu, the eighth Tirthankara of Jainism
भगवान चन्द्रप्रभु की मनोहारी प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के जिला फिरोजाबाद का नाम सुनते ही यहां की चूड़ियों और कांच के उत्पाद के चित्र सामने आते हैं, लेकिन ये जिला इनके अलावा भी एक खास पहचान रखता है। वो क्या है हम आपको बताते हैं। इस शहर में जैन धर्म के अष्टम तीर्थकंर भगवान चन्द्रप्रभु की ऐसी मनोहारी प्रतिमा विराजमान है जो पूरे विश्व में नहीं है। स्फटिकमणि की पद्मासन यह प्रतिमा अतिशयकारी है। मान्यता है कि तमाम अतिशय और चमत्कार इस जिन प्रतिमा से जुड़े हैं। चतुर्थकलानी इस प्रतिमा से कई किदवंती जुड़ीं हैं। इस भव्य प्रतिमा के इतिहास की बात करें तो ये प्रतिमा चतुर्थकालीन है। अब सवाल है फिरोजाबाद के जैन मंदिर में यह प्रतिमा कैसे आई। 

ये है इतिहास 

नगर से 7 किलोमीटर दूर यमुना के किनारे चंदरवाड़ नगर था। धन धान्य से परिपूर्ण इस नगर के राजा थे चन्द्रसेन। उनके महल में बने मंदिर में यह प्रतिमा थी। मुहम्मद गौरी ने जब इस राज्य पर आक्रमण किया तब राजा चन्द्रपाल ने इस प्रतिमा को यमुना में प्रवाहित कर दिया था। मुहम्मद गोरी ने इस नगर को तहस-नहस कर दिया था। 
Story of the statue of Lord Chandraprabhu, the eighth Tirthankara of Jainism
मंदिर में स्वाध्याय कक्ष - फोटो : अमर उजाला
कालांतर में किसी रक्षक देव ने किसी भक्त को स्वप्न दिया कि यमुना की बीच धारा में भगवान की प्रतिमा है। यमुना में फूलों से भरी टोकरी प्रवाहित कर दो। जहां जाकर टोकरी रूक जाए वहीं मूर्ति है। उस भक्त ने अगली सुबह ऐसा ही किया। चमत्कार तब हो गया जब फूलों से भरी टोकरी के साथ भक्त ने यमुना में कदम रखा तब जैसे उसके कदम बढ़ते गए उस स्थान पर पानी कम होता गया। उस स्थान पर भक्त पहुंचा जहां प्रतिमा थी। 
Story of the statue of Lord Chandraprabhu, the eighth Tirthankara of Jainism
भगवान चन्द्रप्रभु का मंदिर - फोटो : अमर उजाला
यमुना की बीच धारा से भगवान की प्रतिमा निकली, तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं। प्रतिमा को लेकर वह घर आ गया। धीरे-धीरे गांव में यह बात पता चली। बताते हैं कि जिस भक्त को स्वप्न आया वह जैन परिवार से नहीं था। 
 
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मूर्ति परिचय - फोटो : अमर उजाला
जैन समाज के लोगों ने प्रतिमा को चन्द्रप्रभु की बताई। गांव के दूसरे लोग इस प्रतिमा को अपने इष्ट की बताने लगे थे। प्रतिमा पर चंद्रमा चिन्ह से मूर्ति चन्द्रप्रभु की बताई। तब यह प्रतिमा जैन समाज के लोगों को मिल सकी। 
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मंदिर में मौजूद प्राचीन शास्त्र - फोटो : अमर उजाला
लोग इस प्रतिमा को धूमधाम से फिरोजाबाद लेकर आए। प्रतिमा को यहां स्थापित किया गया। हजारों नहीं लाखों लोग इस प्रतिमा के दर्शन के लिए पूरे देश से आते हैं।
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