दुनिया में मोहब्बत की मिसाल ताजमहल शुक्रवार को सद्भाव की चादर से सतरंगी हो गया। शाहजहां के उर्स के आखिरी दिन ताजमहल में धर्मगुरुओं ने 1331 मीटर लंबी हिंदुस्तानी सतरंगी चादर चढ़ाई, जिसे देखने और इसका हिस्सा बनने के लिए लोग उमड़ पड़े। सर्वधर्म समभाव की सतरंगी चादर को धर्मगुरुओं ने ताजगंज के हनुमान मंदिर से रवाना किया। न केवल सतरंगी, बल्कि फूलों और मोतियों की चादर भी उर्स में आकर्षण का केंद्र बनी रही। पूरे दिन निशुल्क प्रवेश के कारण ताजमहल में सैलानियों का सैलाब उमड़ आया।
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ताजमहल में पेश की गई सतरंगी चादर
- फोटो : अमर उजाला
शाहजहां के उर्स के तीसरे दिन सुबह ही ताजमहल में तहखाने में स्थित शाहजहां व मुमताज की कब्रों को खोल दिया गया। सुबह फातिहा पढ़ी गई। इसके बाद कुलशरीफ और कुरानख्वानी के बाद चादरपोशी का सिलसिला शुरू हो गया।
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ताजमहल में पेश की गई सतरंगी चादर
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ढोल-ताशों के साथ लोग फूलों और कपड़ों की चादर लेकर आए। शुक्रवार को उर्स का आकर्षण रही 1331 मीटर लंबी हिंदुस्तानी सतरंगी चादर, जिसका एक छोर ताजगंज के दक्षिणी गेट पर था तो एक छोर मुख्य मकबरे पर। इस चादर को पेश करने के बाद देश में अमन-चैन की दुआ की गई।
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ताजमहल में पर्यटकों की भीड़
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उर्स के साथ जुड़ा रहा बारिश का मिथक
शाहजहां के 366वें उर्स के दौरान भी बारिश हुई। इस उर्स के साथ बारिश का मिथक जुड़ा रहा है। कोई उर्स ऐसा नहीं रहा, जब बारिश न हुई हो। खुद्दाम-ए-रोजा कमेटी अध्यक्ष ताहिरुद्दीन ताहिर ने बताया कि चाहे दिसंबर हो या मई-जून की तपती दोपहरी या फिर अब मार्च, हर बार उर्स के तीन दिनों में कभी भी मौसम में बदलाव आता है और अचानक ही बारिश होती रही है।
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ताजमहल में शाहजहां की कब्र पर चादरपोशी करते अकीदतमंद
- फोटो : अमर उजाला
पीली पड़ गई शाहजहां की कब्र
ताजमहल के तहखाने में मौजूद शाहजहां मुमताज की असली कब्रें दो साल बाद पर्यटकों के लिए खोली गई। इस दौरान ताज बंद होने के कारण कब्रें इस बार लोगों को ज्यादा पीली और गंदी नजर आईं। कब्रों का संगमरमर पीलापन और कई दाग लिए नजर आया।