आगरा जिले में अक्तूबर की औसत बारिश का रिकार्ड 24 घंटे में टूट गया। जितनी बारिश पूरे महीने में होती, उसकी दोगुने से अधिक बारिश 24 घंटे में दर्ज हो चुकी है। अक्तूबर माह में 29.4 एमएम औसत बारिश होती है, लेकिन शनिवार से रविवार तक 70.7 एमएम बारिश दर्ज की गई है। मूसलाधार बारिश के कारण जहां शहर में सैलाब जैसे हालात हो गए हैं, तो वहीं देहात में फसलें बर्बाद हो गई हैं। फसलों की बर्बादी देख किसान चिंतित हैं। उनका कहना है कि ऐसी बारिश से ऐसी तबाही पहले कभी नहीं देखी।
अक्तूबर में बेमौसम बारिश आफत बनकर आई है। खराब मौसम को देखते हुए दो दिन के लिए जिले के सभी स्कूलों को बंद कर दिया गया है। खेतों में खड़ी फसलें डूब गई हैं। शहर से लेकर गांव तक सड़कें जलमग्न हैं। रविवार शाम को बारिश का सिलसिला थमा, तो गली-मुहल्लों से लेकर एमजी रोड व आगरा-दिल्ली हाईवे तक जाम लग गया। उधर, बाजारों में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। छुट्टी का दिन और त्योहार पर भी बाजार सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक सूने पड़े रहे।
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सड़क पर जलभराव
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मौसम विज्ञान केंद्र बिचुपरी के अनुसार 13 अक्तूबर तक बारिश का सिलसिला जारी रहने का पूर्वानुमान है। पूरब-उत्तर से पूरब दक्षिण की ओर 13 से 20 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। जिससे दिन का पारा लुढ़क गया है। दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से 9 डिग्री कम 25.6 डिग्री सेल्सियस रहा। रात का पारा 22.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ है।
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पानी में डूबी बाजरा की कटी फसल
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बारिश से बाजरा, धान और सब्जियों की फसल बर्बाद हो गई है। वहीं हाल में बोई सरसों की खेतों में पानी भर जाने से किसानों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है। साथ ही चना, सरसों, आलू की बुवाई में देरी से भी किसान परेशान हैं।
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पानी में डूबी धान की फसल
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फतेहपुर सीकरी क्षेत्र के जहानपुर, मई बुजुर्ग, नगला धीरू, हंसपुरा, गुर्जरपुरा, दुल्हारा, देवनारी, बदरपुर बरनामई, ऊंदेरा, सिकरौदा, औलेंडा, नगला हरबक्श, नगला दधिराम, भड़कौल आदि गांव के समीप तो धान के खेतों में घुटनों पानी भरने से 70-80 फीसदी फसल नष्ट होने की आशंका किसान जता रहे हैं।
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बाजरे की फसल बचाने में जुटे किसान
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बरहन, अहारन, खेड़ी , कुरगवां, मुखवार, नगला ताज, खांड़ा, नगला फूटरा, नगला जौहरी, नगला धौकल के किसानों ने बताया कि बाजरे सहित खरीफ की सभी फसलें तबाह हो गई हैं। बाजरे की बालियां खेतों में तैर रही हैं।