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Radha ashtami 2022: बरसाना में नहीं यहां अवतरित हुईं थीं राधा, पढ़ें ये रोचक कथा

Sun, 04 Sep 2022 02:06 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sun, 04 Sep 2022 02:06 PM IST
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Radha Astami 2022 Radha Birth Place Rawal Village story
राधा कृष्ण

कान्हा के जन्म यानि जन्माष्टमी के बाद मथुरा में एक बार फिर उत्सव का माहौल है। ब्रज में राधाष्टमी मनाई जा रही है। हर ओर उल्लास छाया हुआ है। वहीं विशेष आयोजन बरसाना से 50 किमी दूर रावल में हो रहा है। दरअसल कृष्ण के ह्रदय में वास करने वाली राधारानी बरसाना में पली-बढ़ी थीं, लेकिन उनका अवतरण यहां से 50 किमी दूर रावल गांव में हुआ था। मान्यता है कि यहां स्थापित मंदिर के ठीक सामने एक बगीचा है, जहां आज भी राधा-कृष्ण पेड़ के रूप में मौजूद हैं।



राधाष्टमी पर बरसाना के श्रीराधारानी मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ है। उनके जन्म की खुशियां मनाई जा रही हैं। वैसे तो भगवान श्रीकृष्ण की प्रेयसी, उनकी सखी राधा और राधा के कृष्ण इस पवित्र संबंध से पूरी दुनिया वाफिक हैं, लेकिन राधा के जीवन के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं। आइये बताते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में...

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Radha Astami 2022 Radha Birth Place Rawal Village story
राधा कृष्ण - फोटो : amar ujala

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार राधा का जन्म माता की कोख से नहीं हुआ, बल्कि वो अवतरित हुईं। कहा जाता है कि बरसाना से 50 किमी दूर रावल गांव में राधा अवरित हुई थीं। रावल गांव में राधा का मंदिर है। रावल मंदिर के पुजारी बताते हैं कि करीब पांच हजार साल पहले यहां यमुना की धारा कल-कल बहती थी।

Radha Astami 2022 Radha Birth Place Rawal Village story
राधा

शास्त्रों के अनुसार उस वक्त बृज के सबसे बड़े राजा वृषभान की पत्नी कीर्ति नित्य प्रति यमुना स्नान कर पूजा-अर्चना करतीं थीं। उन्हें पुत्री की लालसा थी। एक दिन पूजा करते समय यमुना से कमल का फूल प्रकट हुआ। स्वर्ण आभा के इस फूल से किरणों का उदय हो रहा था। कीर्ति के पास जाते ही फूल खिल गया, जिस पर एक नन्हीं सी बच्ची थी। उसके नेत्र बंद थे। वो बच्ची कोई और नहीं बल्कि स्वयं राधारानी ही थीं।

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Radha Astami 2022 Radha Birth Place Rawal Village story
राधा

राधा के अवतार के 11 महीने बाद मथुरा में कंस के कारागार में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। वो रात में गोकुल में नंदबाबा के घर पर पहुंचाए गए। तब नंद बाबा ने सभी जगह कृष्ण का जन्मोत्सव संदेश भेजा। राजा वृषभान को भी न्यौता मिला। जब बधाई लेकर वृषभान अपने गोद में राधारानी को लेकर यहां गए तो राधारानी घुटने के बल चलते हुए कान्हा के पास पहुंचीं। वहां बैठते ही राधा के नेत्र खुले और उन्होंने पहला दर्शन बालकृष्ण का किया।

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Radha Astami 2022 Radha Birth Place Rawal Village story
राधा कृष्ण

रावल गांव में स्थापित राधा मंदिर के सामने प्राचीन बगीचा है। यहां आज भी दो पेड़ ऐसे हैं जो एक-दूसरे में समाहित हैं। इन्हें राधा-कृष्ण का ही रूप बताया जाता है। एक पेड़ पीपल का जबकि दूसरा मोर्छली का है। इनमें से एक का रंग श्वेत है तो दूसरा श्याम रंग का।

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