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जहां महाकवि सूरदास ने रचे थे सवा लाख पद, वहां दृष्टिबाधित छात्र लिख रहे कामयाबी की इबारत

Sun, 03 Jan 2021 12:03 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 03 Jan 2021 12:03 AM IST
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physically challenge students achieved success with hard work and dedication in Agra
महाकवि सूरदास महाविद्यालय - फोटो : अमर उजाला

आगरा के सूरदास नेत्रहीन विद्यालय सूरकुटी में पढ़ने वाले 70 दृष्टिबाधित छात्र कंप्यूटर सीखने के साथ-साथ एसएससी और रेलवे प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं। वे देख नहीं सकते। मगर, कंप्यूटर स्क्रीन पर हिंदी और अंग्रेजी में आवाज के संकेत से सब कुछ टाइप कर लेते हैं। चाहे माउस हो या फिर की बोर्ड। उनके लिए कुछ भी चलाना मुश्किल नहीं है। कई छात्र तो प्रतियोगी परीक्षा में कामयाबी हासिल कर नौकरी भी पा चुके हैं। 

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मथुरा मार्ग पर सूर सरोवर पक्षी विहार में पांच एकड़ एरिया में निर्मित सूरदास नेत्रहीन विद्यालय में इस समय आठवीं से बीए तक के 70 छात्र पंजीकृत हैं। उनकी पढ़ाई ब्रेन लिपि में होती है। हॉस्टल में रहना-खाना सब कुछ मुफ्त है। पांच सदस्यीय कंट्रोलर कमेटी इनके खान-पान की व्यवस्था करती है। कहा जाता है कि महाकवि सूरदास ने यहीं पर सवा लाख पद रचे थे। 
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बांदा निवासी बीए के छात्र हरीबाबू कक्षा एक से अब बीए में पहुंच चुके हैं। वह एसएससी और रेलवे की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं। कंप्यूटर चलाना अच्छी तरह जानते हैं। फर्रुखाबाद के मनीष भी एसएससी या बैंकिंग परीक्षा में सफलता हासिल कर अच्छी नौकरी करना चाहते हैं। 

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टाइपिंग करती नेत्रहीन छात्र - फोटो : अमर उजाला
ब्रेन लिपि शिक्षक रवि कुमार प्रजापति बताते हैं कि विद्यालय में अध्ययनरत 15 दृष्टिबाधित छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होकर अच्छे पदों पर नौकरी कर रहे हैं। 

प्रधानाचार्य महेश कुमार बताते हैं कि दृष्टि की बाधा के बाद भी उनके जोश और जज्बे में किसी तरह की कमी नहीं है। वह अपना भविष्य बेहतर बनाने के लिए दिन रात विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे हैं।


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