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मथुरा: 50 साल कैद में रही हथिनी 'फूलकली', नए जीवन के 10 साल पूरे, इस तरह मनाया स्वतंत्रता का जश्न

Fri, 13 May 2022 05:58 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 13 May 2022 05:58 PM IST
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phool kali ten years completed of new life at elephant conservation center mathura
50 साल कैद में रही हथिनी ‘फूलकली’ ने मनाया स्वतंत्रता के 10 साल! - फोटो : Wildlife SOS

उत्तर प्रदेश में भीख मांगने वाली हथिनी के रूप में लगभग 50 वर्ष बिताने के बाद 'फूलकली' ने स्वतंत्रता की दसवीं वर्षगांठ मनाई। वर्षों के दुर्व्यवहार और अपर्याप्त देखभाल ने उसे कई चिकित्सकीय परेशानियां जैसे कि फोड़े, संक्रमित घाव और कटे-फटे पैरों के तलवों के साथ छोड़ दिया था। दस साल पहले, वन्यजीव संरक्षण संस्था वाइल्डलाइफ एसओएस और उत्तर प्रदेश वन विभाग ने फूलकली को रेस्क्यू किया था, जिसके बाद उसे हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र, मथुरा में सुरक्षित जीवन जीने का एक नया अवसर मिला। 2012 में रेस्क्यू से पहले, फूलकली उत्तर प्रदेश के आगरा जिले की सड़कों पर घूमने, भीख मांगने में अपना पूरा दिन बिताती थी। वर्षों के दुर्व्यवहार और उपेक्षा ने उसे कटे नाखून, दर्दनाक रूप से क्षतिग्रस्त फुटपैड और गंभीर बीमारियों के साथ छोड़ दिया था, जिसकी वजह से उसे ना केवल शारीरिक बल्कि मनोवैज्ञानिक आघात भी पंहुचा था।

phool kali ten years completed of new life at elephant conservation center mathura
नदी में नहाती हथिनी - फोटो : Wildlife SOS
इंसानों की तरह, हाथी भी भावुक होते हैं और अपने झुंड से अलग होने का उनके मनोवैज्ञानिक विकास पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। दशकों से फूलकली को अन्य हाथियों के साथ रहने से वंचित रखा गया था, जिसकी वजह से उसे एकांत और क्रूर जीवन सहने के लिए मजबूर होना पड़ा। मथुरा में वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा संचालित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र मेंव फूलकली के आने के बाद उसे माया नाम की हथिनी से मिलवाया गया, जिसे 2010 में एक सर्कस से बचाया गया था। समय के साथ दोनों हथिनियों में अटूट दोस्ती का बंधन बना और माया ने फूलकली की जिंदगी में एक दशक से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
 
phool kali ten years completed of new life at elephant conservation center mathura
जंबो फीस्ट का आनंद लेते हुए - फोटो : Wildlife SOS

आज 65 साल की फूलकली पूरी तरह से बदल चुकी है, जिसने न सिर्फ अपनी ताकत बल्कि अपना आत्मविश्वास भी वापस हासिल किया है। फूलकली को यमुना नदी के किनारे लंबी सैर करने में मजा आता है, जो की सेंटर के करीब एक किमी दूर स्थित है। वह वहां पानी में खेलने में घंटों बिताती है। वर्षों तक कैद में रही फूलकली उस समय कभी पानी में नहीं रही थी, लेकिन वाइल्डलाइफ एसओएस के हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में आने के कुछ ही समय बाद, उसने अपने बाड़े में मौजूद जंबो पूल का भी अच्छे से आनंद लेना शुरू कर दिया था।

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केले खाते हुए हथिनी - फोटो : Wildlife SOS

फूलकली की 10वीं रेस्क्यू वर्षगांठ मनाने के लिए वाइल्डलाइफ एसओएस टीम ने फूलकली के लिए कुछ खास करने का फैसला किया। टीम ने बांस और हरे चारे का उपयोग करते हुए संख्या '10' के आकार में एक ट्रीट बनाई और नदी के किनारे केले, तरबूज, पपीते और कद्दू का जंबो फीस्ट तैयार किया। फूलकली जब अपनी दोस्त माया और एम्मा के साथ नदी में डुबकी लगाकर लौटी तो इस दावत का उसने जमकर लुफ्त उठाया।

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नदी में मस्ती करते हुए - फोटो : अमर उजाला

वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एमवी ने कहा कि "वर्षों की उपेक्षा और दुर्व्यवहार का फूलकली के स्वास्थ्य पर हांनिकारक प्रभाव पड़ा है और उसे ठीक होने में काफी समय लगा। चल रहे उपचार के रूप में, फूलकली को औषद्यीय फुटबाथ मिलता है, उसके फुटपैड नियमित रूप से ट्रिम किये जाते हैं और उसे पौष्टिक एवं स्वस्थ आहार दिया जाता है। वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव, गीता शेषमणि ने कहा कि हाथी अत्यधिक बुद्धिमान और सामाजिक प्राणी होते हैं और जंगल या कैपटिविटी दोनों में ही एक दूसरे के साथ बेहद मजबूत पारिवारिक बंधन बनाते हैं। झुंड से अलग होना एक हाथी के लिए बेहद तनावपूर्ण और दर्दनाक हो सकता है। हम फूलकली, माया और एम्मा के बीच विश्वास और दोस्ती के बंधन को देखकर खुश हैं।

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