आगरा जिले के जैतपुर क्षेत्र के बड़ागांव में अनारक्षित सीट पर सामाजिक पंचायत ने 14 मार्च को गांव की शिक्षित बेटी सरला सिंह गुर्जर को प्रधान बनाने का फैसला किया था। अब आरक्षण में सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित होने पर रविवार को दोबारा पंचायत की गई। इसमें शिक्षित बहू कल्पना को प्रधान चुनने का निर्णय लिया गया।
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बड़ागांव में हुई सामाजिक पंचायत
- फोटो : अमर उजाला
गांव के हनुमान मंदिर पर सभी समाज के लोग जुटे। करीब तीन घंटे चली पंचायत में गांव की परास्नातक बहू कल्पना को ग्राम पंचायत की बागडोर सौंपने पर सभी राजी हुए। कल्पना ने कहा कि गांव में जल निकासी के लिए नालियां, पीने के लिए पानी, खुले में शौच से मुक्ति दिलाने के लिए शौचालय का निर्माण, पंचायत घर और बुजुर्ग, विधवाओं को पेंशन दिलाना प्राथमिकता होगी। बड़ा गांव के इस फैसले की चर्चा आसपास के अन्य गांवों तक रही।
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कल्पना और उनके पति शिव नारायन
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पंचायत के निर्णय से सुर्खियों में आई कल्पना ने बताया कि उच्च शिक्षित बनने के लिए ही 23 अप्रैल 2000 को शिक्षक शिव नारायन से शादी की। पति ने शादी के बाद उन्हें इंटरमीडिएट, स्नातक, परास्नातक और बीएड की पढ़ाई कराई।
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कल्पना
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दो साल पति के साथ चौधरी क्षेत्रपाल सिंह डिग्री कॉलेज में अध्यापन कार्य भी किया। उन्होंने बताया कि पिछड़े तबके की बेटियों की शिक्षा उनकी प्राथमिकता है। गांव की तरक्की और विकास के लिए संघर्ष का पंचायत ने अवसर दिया है।
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सरला गुर्जर
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पूर्व में उम्मीदवार बनाई गई सरला सिंह गुर्जर ने आरक्षण के बाद कल्पना को पंचायत में प्रधान चुने जाने पर खुशी जताई है। सरला ने कहा कि गांव के सभी लोगों के खाते खुलवाकर शासन की योजनाओं का लाभ दिलाना, गांव की तरक्की के लिए ग्राम पंचायत के अलावा जनप्रतिनिधियों की निधि लगाने के लिए वह अपनी लड़ाई जारी रखेंगी। समाज के बीच पैदा हुई खाईं को पाटना भी उनका मकसद है।