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चंबल नदी में बढ़ रहा राष्ट्रीय जलीय जीव का कुनबा, दोगुनी हुई डॉल्फिन की संख्या

Thu, 21 Jan 2021 01:25 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 21 Jan 2021 01:25 PM IST
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number of dolphins doubled in Chambal river
चंबल नदी में डॉल्फिन - फोटो : अमर उजाला

चंबल नदी में संरक्षित राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन मछली का कुनबा बढ़ रहा है। चार और पांच जनवरी को हुई गणना में चंबल सेंचुरी की बाह और इटावा रेंज में 171 डॉल्फिन मिली हैं। जबकि वर्ष 2012 के सर्वे में महज 78 डॉल्फिन मिलीं थीं। चंबल में इनकी संख्या बढ़ने से वन विभाग के अफसर उत्साहित हैं।



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चंबल नदी - फोटो : अमर उजाला
लुप्तप्राय जलीय जीवों में शामिल डॉल्फिन का चंबल नदी में वर्ष 2009 से संरक्षण हो रहा है। पांच अक्तूबर 2009 में डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया था। वर्ष 2012 में मेरी गंगा, मेरी सूंस अभियान के तहत कराई गई गिनती के दौरान प्रदेश की नदियों में डॉल्फिन की संख्या 671 पाई गई थी। जिनमें चंबल नदी में 78 मिली थीं। 
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चंबल नदी में डॉल्फिन - फोटो : अमर उजाला
चंबल सेंचुरी की बाह रेंज के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि इस साल हुई गिनती में बाह रेंज में 24 डॉल्फिन मिली हैं। इटावा के रेंजर हरि किशोर शुक्ला के मुताबिक इटावा रेंज में 147 डॉल्फिन मिली हैं। कुल 171 डॉल्फिन मिली हैं। 
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चंबल नदी - फोटो : अमर उजाला
दो से तीन साल में एक बच्चे को देती हैं जन्म
बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि मादा डॉल्फिन का गर्भकाल 9 से 11 महीने का होता है। मार्च से अक्तूबर के मध्य में बच्चा देती हैं। दो से तीन साल में एक बार में एक ही बच्चा देती हैं। दो वर्षों तक मादा बच्चे की देखभाल करती हैं। औसत जीवन 28 साल का होता है।              
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चंबल में डॉल्फिन - फोटो : अमर उजाला
जल का बाघ मानी जाती हैं डॉल्फिन
रेंजर के मुताबिक जंगलों में जो स्थान बाघ का होता है, पानी में वही स्थान डॉल्फिन का माना जाता है। डॉल्फिन की मौजूदगी नदी के पानी की स्वच्छता का सूचक भी होती है। 


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