आगरा जिले के बाह रेंज में चंबल नदी में गुरुवार को घड़ियालों का कुनबा बढ़कर 2211 हो गया। लखनऊ कुकरैल प्रजनन केंद्र में जन्मे 35 घड़ियाल (12 नंदगवां, 11 सहसों, 12 महुआ सूडा घाट) चंबल नदी में छोड़े गए। चंबल की बालू से इनके अंडे लखनऊ कुकरैल प्रजनन केंद्र ले जाए गए थे। पिछले माह हुए सर्वे में 2176 घड़ियाल मिले थे।
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चंबल नदी में छोड़े गए घड़ियाल
- फोटो : अमर उजाला
बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि करीब तीन साल की देखरेख के बाद घड़ियालों की लंबाई 120 सेमी होने पर इनको नदी में छोड़ा गया है। एक से डेढ़ महीने तक यह नदी के किनारे विचरण करेंगे और फिर गहरे पानी की तरफ बढ़ जाएंगे।
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चंबल नदी में घड़ियाल के बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
घड़ियाल विशेषज्ञ जैलाबुद्दीन के मुताबिक कुकरैल प्रजनन केंद्र में चंबल से घड़ियाल के अंडों को ले जाकर निगरानी में हैचिंग कराई जाती है। घड़ियाल किस जलवायु में राहत महसूस करते हैं, इस पर रिसर्च होती है। घड़ियालों के वयस्क हो जाने के बाद इन्हें प्राकृतिक वास (चंबल नदी) में छोड़ा जाता है। घड़ियालों को नदी में छोड़े जाने के दौरान वन दरोगा विष्णु पाल सिंह चौहान, सूर्यकांत शुक्ला लखनऊ से आए थे।
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अंडे से बाहर आया घड़ियाल का बच्चा (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
चंबल नदी के किनारे रेत में जहां मादा घड़ियाल अंडे देती हैं, वहां से अंडों को इकट्ठा करके कुकरैल प्रजनन केंद्र ले जाया जाता है। वहां इनकी हैचिंग की जाती है। देखरेख में ही अंडों से घड़ियाल के बच्चे बाहर आते हैं। करीब तीन साल तक इन्हें मछलियां खिलाकर केंद्र में पाला जाता है।
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चंबल नदी में घड़ियाल
- फोटो : अमर उजाला
दुनियाभर में घड़ियालों की आबादी संकट में है। घड़ियालों की 80 फीसदी आबादी चंबल में मौजूद है। हर साल इनकी संख्या बढ़ रही है। पिछले साल गणना में 1,876 घड़ियाल मिले थे। चंबल नदी में वर्ष 1979 से घड़ियालों का संरक्षण हो रहा है। अब इनकी संख्या बढ़कर 2211 हो गई है।