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जन्माष्टमी: भाईचारे की डोर से कान्हा की पोशाक बना रहे कादिर और इमरान, ऐसा है अपना हिंदुस्तान
Tue, 20 Aug 2019 06:40 PM IST
Abhishek Saxena
राजीव अग्रवाल, अमर उजाला, मथुरा
राजीव अग्रवाल, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 20 Aug 2019 06:40 PM IST
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जन्माष्टमी के लिए ठाकुरजी का पोशाक बना रहे मुस्लिम कारीगर
- फोटो : अमर उजाला
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मुस्लिम भाई भगवान श्रीकृष्ण और राधा की सुंदर और आकर्षक पोशाकें तैयार कर रहे हैं। ब्रज के लाला के जन्मोत्सव की तैयारियों में जुटे मुस्लिम समाज के लोग सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दे रहे हैं। अल्लाह के बंदे श्रद्धा के साथ जन्माष्टमी के दिन ठाकुरजी के शृंगार में पहनाई जाने वाली पोशाक के निर्माण में जुटे हैं। इन पोशाक को भारत ही नहीं विदेशों में भी भेजा जाना है।
जन्माष्टमी के लिए ठाकुरजी का मुकुट बनाते मुस्लिम कारीगर
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा की गलियों में पोशाक और मुकुट शृंगार का व्यवसाय फैला है। 100 से अधिक कारखानों में अधिकांश मुस्लिम समाज के लोग दिन-रात एक कर ठाकुरजी के लिए मुकुट, पोशाक और शृंगार का सामान तैयार कर रहे हैं। श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व आते ही पोशाक निर्माण कार्य में तेजी आ गई है। कारीगर दिन-रात एक कर इन पोशाकों को तैयार करने में तल्लीन हैं। ठाकुर जी का मुकुट, गले का हार, पायजेब, बगलबंदी, चूड़ियां और कान का कुंडल कारखानों में तैयार हो रहे हैं।
मुस्लिम कारीगर
- फोटो : अमर उजाला
कादिर ने बताया कि मुकुट में जरी, मोती, नग और खासतौर से शीशे का काम किया जाता है। जर्किन, शीशे वाला मुकुट ज्यादा खूबसूरत होता है क्योंकि इसकी लाइटिंग अधिक रहती है। शीशे का नग दिल्ली और मुंबई के बाजारों से खरीदा जाता है। इसके अलावा गले के हार में छोटे व बारीक नग लगाया जाता है जो देखने में काफी सुंदर होता है।
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कान्हा की पोशाक, सांकेतिक तस्वीर
इमरान मीर ने बताया कि पोशाक के लिए स्थानीय कपड़े का इस्तेमाल होता है। कारीगर आभूषण तैयार करने से पहले डिजाइन बनाकर कागज पर स्केच तैयार करते हैं। इसके बाद इसमें जरी, लाल मोती, स्टोन व मखमल आदि की कड़ाई की जाती है। शानू ने बताया कि इन दिनों हम लोग दिन रात एक कर पोशाकों को तैयार करने में लगे हुए हैं। हर दिन 12 घंटे पोशाक निर्माण करते हैं जब कहीं जाकर आर्डर पूरे हो पाते हैं।
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान (फाइल फोटो)
इमरान अंसारी ने बताया कि पोशाक में लहंगा, ओढ़नी, पटुका के साथ मुकुट आदि शृंगार का निर्माण किया जाता है। इसमें नगों और सितारों का प्रयोग होता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष नीले और सफेद रंग की पोशाकों के निर्माण के आर्डर मिले हैं। इन देशों से मिले हैं आर्डर अमेरिका, आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, कनाडा, नेपाल, स्वीजरलैंड, अफ्रीका से आर्डर मिले हैं।