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जन्माष्टमी: भाईचारे की डोर से कान्हा की पोशाक तैयार कर रहे 'खुदा के बंदे', ऐसा है अपना हिंदुस्तान
Sat, 08 Aug 2020 12:38 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 08 Aug 2020 12:38 AM IST
सार
ब्रज की गलियों में पोशाक और मुकुट श्रृंगार का कारोबार फैला हुआ है
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कान्हा की पोशाकें तैयार कर रहे मुस्लिम समाज के लोग
- फोटो : अमर उजाला
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर हिंदू ही नहीं बल्कि ब्रज का मुस्लिम समाज भी पूरी लगन और श्रद्धा के साथ तैयारियों में जुटा है। ब्रज के मुस्लिम भगवान श्रीकृष्ण और राधा की सुंदर और आकर्षक पोशाकें तैयार कर रहे हैं। ब्रज के लाला के जन्मोत्सव की तैयारियों में जुटे मुस्लिम समाज के लोग सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दे रहे हैं। लेकिन इस साल कोरोना महामारी ने पोशाक कारोबार पर असर डाला है। मंदिर बंद होने से बाजार में खरीदार कम मिल रहे हैं।
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कान्हा की पोशाक
- फोटो : अमर उजाला
ब्रज की गलियों में पोशाक और मुकुट श्रृंगार का कारोबार फैला हुआ है। मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन सहित अन्य कस्बों और गांवों में एक हजार से अधिक कारखानों में ठाकुरजी की पोशाक बनाने का काम चलता है। मथुरा और वृंदावन में अधिकांश मुस्लिम समाज के लोग ठाकुरजी की पोशाक बनाते हैं। पिछले दो दशक से यह कारोबार अपनी नई ऊंचाइयों को छूता गया, लेकिन पिछले पांच माह से इस कारोबार पर कोरोना का ऐसा साया पड़ा कि पोशाक कारोबार पटरी पर नहीं लौटा है। जनपद में कुछ ही कारखाने ही पोशाक तैयार कर रहे हैं।
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ठाकुर जी पोशाक
- फोटो : अमर उजाला
ठाकुर जी का मुकुट, गले का हार, पायजेब, बगलबंदी, चूड़ियां और कान का कुंडल को कारीगर हाथ से पूरी कारीगरी करके इन पोशाकों को तैयार करते हैं।
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कृष्ण जन्माष्टमी के लिए पोशाक बनाते मुस्लिम कारीगर
- फोटो : अमर उजाला
मुकुट में जरी, मोती, नग और खासतौर से शीशे का काम किया जाता है। जर्किन, शीशे वाला मुकुट ज्यादा खूबसूरत होता है। शीशे का नग दिल्ली और मुंबई के बाजारों से खरीदा जाता है। कोरोना के कारण इस बार न दिल्ली से माल आया और न मुंबई से सामान आ सका है। - आसिफ, पोशाक कारोबारी
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आबिद, पोशाक व्यापारी
- फोटो : अमर उजाला
पोशाकों को बनाने का काम जहां हिंदू करते हैं वहीं 60 प्रतिशत मुस्लिम कारीगर बेजोड़ कारीगरी करके इन पोशाकों को तैयार करते हैं। श्रद्धालु भी यहां की बेजोड़ कारीगरी के मुरीद बन गए हैं। पहले श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से छह माह पूर्व काम शुरू हो जाता था, लेकिन इस बार काम अब शुरू किया है। कोरोना महामारी ने व्यापार पर नकारात्मक असर डाला है। - आबिद, पोशाक व्यापारी