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मथुरा: बैंक के अंदर घुसा बंदर, टेबल-कुर्सी पर मचाई उछलकूद, थमी रहीं ग्राहकों और कर्मचारियों की सांसें
Sat, 06 Feb 2021 12:19 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 06 Feb 2021 12:19 AM IST
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बैंक की शाखा के अंद बैठा बंदर
- फोटो : अमर उजाला
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मथुरा जनपद में बंदरों का उत्पाद बढ़ता जा रहा है। मथुरा जनपद के बलदेव कस्बा में भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में एक बंदर शुक्रवार को घुस गया। बंदर के बैंक में अंदर घुसते ही खलबली मच गई। ग्राहकों में अफरा-तफरी मच गई। डर के कारण कई ग्राहक कोनों में छिप गए। वहीं बैंक कर्मचारी भी घबरा गए। काफी देर तक बैंक में स्थिति खलबली वाली रही।
बलदेव में बैंक की शाखा के अंदर घुसा बंदर
- फोटो : अमर उजाला
बैंक में ग्राहकों की भीड़ के कारण बंदर भी कांच, कुर्सी और टेबल पर उचल कूद मचाने लगा। कर्मचारी भी बंदर से बचते रहे। बैंक की शाखा का मुख्य गेट का छोटा भाग खुला होने के कारण बंदर को बाहर का रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था। कर्मचारियों ने बड़ी मुश्किल से बंदर को बैंक से बाहर निकाला। तब जाकर ग्राहक और बैंक कर्मचारियों ने राहत की सांस ली।
मथुरा: नगर निगम की बाउंड्री वॉल पर बैठे बंदर
- फोटो : अमर उजाला
तीन बार बदला मंकी सफारी का स्थल, छह वर्ष में स्थान का नहीं हो सका चयन
गौरतलब है कि मथुरा, वृंदावन और गोवर्धन सहित जनपद में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीते लगभग छह वर्षों में बंदरों की तादाद इतनी बढ़ी कि यह एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। मंकी सफारी स्थल तीन बार बदला जा चुका है, लेकिन चयन आज तक नहीं हो पाया है।
गौरतलब है कि मथुरा, वृंदावन और गोवर्धन सहित जनपद में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीते लगभग छह वर्षों में बंदरों की तादाद इतनी बढ़ी कि यह एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। मंकी सफारी स्थल तीन बार बदला जा चुका है, लेकिन चयन आज तक नहीं हो पाया है।
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वृंदावन में बंदर (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
समाजसेवी देवेंद्र शर्मा ने बताया कि मथुरा में बंदरों के बढ़ते उत्पात के बाद वर्ष 2013-14 में बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ने की योजना बनाए जाने की मांग उठने लगी। आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं के बाद पहली बार वर्ष 2015 में वन विभाग ने मथुरा-वृंदावन के बीच वन चेतना केंद्र में मंकी सफारी बनाए जाने की योजना बनाई। लेकिन दो नगरों के बीच स्थान होने के कारण इस पर एक राय नहीं बनी। इसके बाद चौमुहां में 25 एकड़ भूमि पर काम शुरू हुआ, लेकिन नेशनल हाइवे होने के कारण आए दिन बंदरों से होने वाली दुर्घटनाओं की आशंकाओं को देखते हुए योजना ठंडे बस्ते में चली गई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
वर्ष 2019 में वेटरनेरी विश्वविद्यालय में हुई वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और अधिकारियों के सेमिनार में फरह के चुरमुरा में मंकी सफारी या मंकी रेसक्यू सेंटर बनाए जाने पर सहमति बनी। लेकिन दो वर्ष बीतने के बाद भी योजना केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से आगे नहीं बढ़ी है। इसके पीछे बजट की उपलब्धता न होना बताया गया है।