आगरा में बंदरों का आतंक थम नहीं रहा है। रुनकता में बंदर ने मां की गोद में दूध पीते 12 दिन के मासूम को छीन कर मार डाला। फिर अगले ही दिन कागारौल में वृद्धा की जान ले ली। आलम यह है कि इलाके में युवा लाठी-डंडे लेकर घरों में पहरेदारी कर रहे हैं।
तस्वीरें: आगरा में 'मौत' बनकर घूम रहे बंदर, 12 दिन के मासूम के बाद वृद्धा को मार डाला
शहर से देहात तक बंदरों का खौफ है, लेकिन प्रशासन पर कोई फर्क पड़ता नजर नहीं आ रहा है। सोमवार को रुनकता में 12 दिन के सनी को मां की गोद से छीन कर बंदर ने मार डाला था। इस घटना ने सभी का दिल झकझोर दिया था। इसके अगले ही दिन एक और घटना हो गई।
तस्वीरें: आगरा में 'मौत' बनकर घूम रहे बंदर, 12 दिन के मासूम के बाद वृद्धा को मार डाला
कागारौल की 58 वर्षीय भूरन देवी पर बंदरों ने हमला कर दिया। घटना उस वक्त हुई, जब वो शौच के लिए जा रही थी। बंदरों ने भूरन देवी को बुरी तरह जख्मी कर दिया। चीख-पुकार सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने बंदर भगाए। परिजनों ने घायल भूरन देवी को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उनकी मौत हो गई।
तस्वीरें: आगरा में 'मौत' बनकर घूम रहे बंदर, 12 दिन के मासूम के बाद वृद्धा को मार डाला
देहात में ही नहीं आगरा शहर में भी बंदरों का खौफ है। शहर में ही 50 कॉलोनियां ऐसी हैं, जहां बंदरों से बचने के लिए लंगूर किराए पर रखे गए हैं। इनमें सुभाष पार्क, कमला नगर, रावतपाड़ा शामिल हैं। पुलिस लाइन में भी लंगूर किराए पर रखे गए हैं। एक लंगूर का एक दिन का किराया 300 रुपये है।
तस्वीरें: आगरा में 'मौत' बनकर घूम रहे बंदर, 12 दिन के मासूम के बाद वृद्धा को मार डाला
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बंदर के हमले में घायल हुई चीनी पर्यटक
- फोटो : अमर उजाला
बंदर सिर्फ लोगों पर हमले नहीं कर रहे हैं। इनकी वजह से देश की बदनामी भी हो रही है। कारण है कि ताज, सिकंदरा और फतेहपुर सीकरी स्मारक में बड़ी संख्या में बंदर हो गए हैं। ताज में पिछले एक साल में बंदर तीन बार सैलानियों पर हमला कर चुके हैं।