मथुरा के बलदेव के शाहपुर हवेली स्थित हवेली वाले मंदिर की माता के मनीष अनन्य भक्त थे। वह हर मंगलवार और शनिवार को माता के दर्शन करने जरूर जाते थे। मंदिर पर मन्नत की पोटलियां बांधी जाती हैं। मनीष के घर में स्थित माता के मंदिर में भी दो लाल पोटलियां रखी मिली हैं। मनीष के तीन बच्चे, हंसता खेलता परिवार था, फिर क्या मन्नत थी, जिसकी पोटलियां उसने घर में रखी हुई थीं। यह सवाल भी खड़ा हो गया है।
खप्परपुर गांव के नजदीक ही शाहपुर हवेली गांव में माता का मंदिर है। इस मंदिर की स्थापना 10 साल पूर्व की गई थी। मंदिर के पुजारी मनीष महाराज उर्फ गर्गाचार्य के पिता करुआ बाबा ने बताया कि मनीष स्थापना से ही मंदिर से जुड़े हुए थे। उन्होंने निर्माण के दौरान श्रमदान किया था।
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किसान मनीष और सीमा की फाइल फोटो और सुसाइड नोट
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वह बहुत भले आदमी थे, यह कहते हुए करुआ बाबा रो पड़े। हालांकि लोगों का कहना है कि उन्होंने धन भी दिया था। तभी से वह देवी की उपासना करते थे। करीब तीन माह पहले मनीष को टाइफाइड हो गया था। गांव वालों ने बताया कि बीमारी से ठीक होने के बाद मनीष घर से कम ही बाहर निकलते थे।
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मथुरा में हत्या और सुसाइड के बाद जांच करती पुलिस
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मंदिर में मन्नतों को पूरी करने के लिए नारियल वाली पोटली बांधी
वह केवल मंदिर में पूजा करने के लिए मंगलवार व शनिवार को जाते थे। मान्यता है कि इस मंदिर में मन्नतों को पूरी करने के लिए नारियल वाली पोटली बांधी जाती हैं। मंदिर में लाल, पीली और सफेद पोटलियां बंधी हुई हैं।
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जांच करती पुलिस
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सफेद पोटली पितरों के लिए, जबकि लाल पोटली मन्नत के लिए बांधी जाती है। इसी तरह की दो लाल पोटलियां मनीष के घर में बने मंदिर में भी रखी हुई मिलीं। अगर मनीष की कोई मन्नत थी तो वह इन पोटलियों को मंदिर में जाकर बांधते। इसको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर मनीष की ऐसी क्या मन्नत थी।
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मथुरा में हत्या और सुसाइड के बाद शवों को लेकर जाते हुए
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एक चिता पर दंपती को दी मुखाग्नि... अंतिम विदाई देने उमड़ी भीड़
मथुरा के खप्परपुर के एक ही परिवार के पांच सदस्यों के शव पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंचे तो करुण कंद्रन शुरू हो गया। खप्परपुर के अलावा आसपास के गांवों से भी सैकड़ों लोग यमुना किनारे ब्रह्मांड घाट के पास स्थित शमशान घाट पहुंचे।