जिंदगी का एक नया सवेरा कहीं से भी, कैसे भी शुरू हो सकता है। इसका जीता जागता उदाहरण हैं फतेहाबाद के निबोहरा निवासी प्रताप सिंह और एटा के धुमरी की रहने वाली नीरज। दोनों पैरों से दिव्यांग नीरज दो साल पहले अस्पताल में जिंदगी की उम्मीद ही छोड़ चुकी थी, प्रताप सिंह ने सहारा दिया। अब दोनों ने परिजनों की रजामंदी से मंगलवार को शादी कर बटेश्वर नाथ के दर पर मत्था टेक अपना नया सफर शुरू किया है।
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दंपती नीरज और प्रतापसिंह
- फोटो : अमर उजाला
धुमरी एटा के नगला शंकर की रहने वाली दोनों पैरों से दिव्यांग नीरज को माता पिता ने कन्या गुरुकुल में छोड़ दिया था। वहीं प्रयागराज हाईकोर्ट में वकालत करने वाले एक पैर से दिव्यांग फतेहाबाद के निबोहरा गांव निवासी प्रताप सिंह दिव्यांग संस्था का संचालन कर दिव्यांगों की पढ़ाई और कानूनी लड़ाई में सहायता करते हैं।
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दंपती नीरज और प्रतापसिंह
- फोटो : अमर उजाला
नीरज अपनी और अपने जैसे दिव्यांगों की मदद के लिए उनके संपर्क में आई। दो साल पहले हालत बिगड़ने पर कन्या गुरुकुल ने नीरज को हॉस्पिटल में अपने हाल पर छोड़ दिया।
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बटेश्वर
- फोटो : अमर उजाला
बीमारी से तंग नीरज जिंदगी की उम्मीद छोड़ बैठी थी। तभी प्रताप सिंह ने सहारा दिया। मेल जोल के दौरान दोनों में प्रेम हो गया। उसके बाद परिजनों को मनाया।
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नवदंपती नीरज और प्रतापसिंह
- फोटो : अमर उजाला
शादी के लिए हामी भरने पर माता पिता के आंगन में मंगलवार की सुबह सात फेरे लिए। वहां से सीधे बटेश्वर पहुंच भोले के दर पर मत्था टेका और जिंदगी का नया सफर शुरू कर दिया। ( जैसा कि प्रताप सिंह और नीरज ने बताया।)