महाराष्ट्र के पुणे जिले के बारामती में हुए विमान हादसे में उप मुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया। विमान में सवार पांच अन्य लोग भी इस हादसे में नहीं बचे। ऐसा ही हादसा हुआ था वर्ष 2001 में, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सहित आठ लोगों की जान चली गई थी। ये हादसा उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के भैसरोली गांव में हुआ था। दुर्घटना का कारण खराब मौसम बताया गया था।
अमर उजाला के पुराने पन्नों के अनुसार पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माधवराव सिंधिया 30 सितंबर 2001 को दिल्ली से कानपुर एक रैली में भाग लेने जा रहे थे। चार्टर्ड विमान सो-90 के इंजन में 1.20 बजे तकनीकी खराबी आ गई और उसमें आग की लपटें निकलने लगीं। इस पर चालक ने विमान को एक खेत में उतार दिया। लेकिन उसी दौरान उसका ईंधन टैंक फट गया और धमाके को आवाज के साथ आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। धमाका और विमान को खेत में जलता देख गांव वाले तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और उन्होंने आग में मिट्टी डालकर उसे बुझाने का प्रयास किया। उस समय मूसलाधारा बारिश भी हो उठ रही थी, लेकिन लपटें कम नहीं हुई। गांव वालों ने जैसे-तैसे आग पर काबू पाने के बाद विमान से पांच शवों को निकाला। इनमें सिंधिया का भी शव शामिल था। सभी शव बुरी तरह झुलसे हुए थे। सिंधिया के अलावा पांच अन्य शवों की शिनाख्त कर पाना मुश्किल थी।
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हादसे की तस्वीर, जो अमर उजाला में प्रकाशित हुई
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इस तरह हुआ था हादसा
अमर उजाला के पुराने पन्नों में प्रकाशित खबरों के अनुसार जब हादसा हुआ, उस समय बारिश हो रही थी। अचानक विमान लड़खड़ाया और नाक के बल नीचे जा गिरा। लपटें निकलती दिखीं। तब भी किसी को क्या पता था कि इस विमान में कौन लोग थे। लेकिन पता चला तो सब सन्न रह गए। जलता हुआ विमान चक्कर काट कर गिर पड़ा। देखते ही देखते हजारों की संख्या में क्षेत्रीय ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि विमान में आकाश में हो आग लग गई थी और वह गिरते समय तेज आवाज के साथ धू-धू कर जलने लगा था। लगभग 1.30 बजे ग्राम भैंसरोली के ऊपर आग लगे विमान ने दो चक्कर लगाए और धमाके की आवाज के साथ ग्राम भैसरोली व नूरमपुर के मध्य एक खेत में जा गिरा। विमान से लपटें निकल रहीं थी।
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पत्रकारों ने गवांई थी जान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आधा किलोमीटर क्षेत्र में बिखर गया था पूरा विमान
दृश्य इतना वीभत्स था कि देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। पूरा विमान कई हिस्सों में टूटकर लगभग आधा किलोमीटर क्षेत्र में बिखर गया था। विमान में सवार लोग बुरी तरह जल गए थे। उनकी पहचान करना भी मुश्किल था। लगभग 5.15 बजे वहां कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद और पत्रकार डा. एजाज दलवी पहुंचीं। तब लोगों की पता चला कि विमान हादसे में किसकी मृत्यु हुई है। श्रीमती लुईस फूट-फूटकर रो रहीं थीं। शव निकाले गए। बुरी तरह से जले हुए थे। शरीर के सभी अंग टूटे-फूटे थे। सेफ्टी-बेल्ट से बंधे हुए थे। शायद किसी को भी सेफ्टी बेल्ट खोलने तक का मौका नहीं मिल सका था।
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Madhavrao Scindia Plane Crash Story
- फोटो : अमर उजाला
पायलेट ने किया था हादसा बचाने का पूरा प्रयास
ग्रामीणों का कहना था कि पायलट ने विमान को खेत में उतारने का पूरा प्रयास किया लेकिन विमान में तब तक आग फैल चुकी थी। मलवे के पास माधवराव सिंधिया का मोबाइल फोन पड़ा हुआ था। उस दिन मैनपुरी, घिरोर, कुरावली में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा थी, जिसमें आए कई वरिष्ठ नेता खबर सुनकर घटनास्थल पर पहुंचे थे।
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Madhavrao Scindia Plane Crash Story
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गांव के ऊपर नहीं गिरने दिया था विमान
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि पायलट ने संभवतः गांव के ऊपर विमान गिरने से बचाया। यदि आग लगा विमान गांव में गिर गया होता तो और अधिक भीषण दुर्घटना हो जाती। घटनास्थल पर सबसे पहले ग्राम भैसरोली के रामलड़ते पहुंचे और उन्होंने भोटा रेलवे स्टेशन से भोगांव बेवर पुलिस को सूचना दी। कुछ न सूझा तो गांव के लोगों ने मिट्टी, पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया। लेकिन वे सफल नहीं हो सके थे।