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बिटिया की अर्थी पर रखे उपहार, सब रोए जार-जार, एक साथ जलीं मां-बेटियों की चिताएं

Tue, 26 Feb 2019 11:02 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 26 Feb 2019 11:02 AM IST
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last rites of mother and daughters with toys in agra
मां-बेटियों का अंतिम संस्कार
आगरा के पांडव नगर में सोमवार को सिसकियों के बीच मां-बेटियों की अर्थी उठी तो आंसुओं की धारा बह निकली। सचिका की अर्थी पर उपहार रखे गए थे। ये उपहार सचिका की छोटी बहन कायरा के जन्मदिन के लिए आए थे। यह देख कलेजे मुंह को आ गए।
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मां-बेटियों का अंतिम संस्कार
जिस गली में बच्चियां खेलती थीं, वहीं से उनकी अर्थी निकल रही थी। मां उन्हें शाम को रोज पार्क ले जाती थी। मां की अर्थी आगे है, पीछे बड़ी बेटी की अर्थी है। छोटी के शव को परिजनों ने हाथों में ले रखा है। कायरा के जन्मदिन के लिए जो लोग उपहार खरीद लाए थे, वे भी इस अंतिम यात्रा में शामिल थे।
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मां-बेटियों का अंतिम संस्कार
रितु के पति रोहित धूपड़ तो खुद को संभाल ही नहीं पा रहे थे। रोहित के पिता डॉक्टर नवीन बेटे से कह रहे थे, ये क्या हो गया, चुप हो जा बेटा। उनकी खुद की आंखों से आंसुओं की धारा रुक नहीं रही थी। सोमवार की सुबह छह बजे पोस्टमार्टम के बाद साढ़े आठ बजे शव पांडव नगर में पहुंचे। भारी भीड़ जमा थी। हर कोई यही सवाल किए जा रहा था, ये क्या हो गया? कैसे हो गया? 
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मां रितु के साथ मासूम कायरा
रितु का सपना था कि बेटियां डॉक्टर बनें। वह बेटियों को खुद पढ़ाती थी। रितु टीचर थी। बेटियों की हर चीज का ख्याल रखती थी। सचिका तो कई बार कहती भी थी, मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं। कायरा पूरे घर की लाडली गुड़िया थी। उसके जन्मदिन पर हर बार रिश्तेदारों को भी बुलाया जाता था।
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मां-बेटियों का अंतिम संस्कार
तितली गारमेंट्स नाम से रोहित की दुकान और उनके पिता डॉक्टर नवीन का दवाखाना जयपुर हाउस में है। इस दुखद घटना पर उनके आसपास की दुकानें बंद रहीं। हालांकि सोमवार को साप्ताहिक बंदी रहती है। फिर भी कुछ दुकानें खुल जाती हैं लेकिन सभी बंद थीं। दुकानदार शोक व्यक्त करने रोहित के घर गए थे। 
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