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Vijay Diwas 2020: भारतीय सैनिकों का पराक्रम देख जान बचाकर भागे थे पाकिस्तानी फौजी

Sun, 26 Jul 2020 12:25 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 26 Jul 2020 12:25 PM IST
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Kargil War Vijay Diwas 2020 in India: Kargil War Hero Brigadier Sameer Bhadoria story
कारगिल विजय दिवस

7 जुलाई 1999 का दिन... जब ब्रिगेडियर समीर भदौरिया ने टीम के साथ घपाक पोस्ट पर कब्जा कर तिरंगा लहराया था। भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस और पराक्रम को देखकर पाकिस्तानी सेना की रूह कांप गई थी। आलम यह था कि पाकिस्तानी फौजियों को जान बचाने के लाले पड़ गए थे। वो मौत को करीब देख अपनी मोटरें छोड़कर भाग खडे़ हुए थे। कारगिल युद्ध के हीरो रहे आगरा जिले के गांव रुदमुली निवासी ब्रिगेडियर समीर भदौरिया ने यह शौर्यगाथा सुनाई। उन्होंने बताया कि कारगिल युद्ध का एक-एक संस्मरण भारतीय सेना की शौर्य गाथाओं से भरा हुआ है। 

Kargil War Vijay Diwas 2020 in India: Kargil War Hero Brigadier Sameer Bhadoria story
ब्रिगेडियर समीर भदौरिया - फोटो : अमर उजाला
बाह क्षेत्र के गांव रुदमुली की बलिदानी माटी में पैदा हुए ब्रिगेडियर समीर भदौरिया ने बतौर मेजर कारगिल जंग लड़ी थी। कारगिल की मस्को घाटी में उनकी यूनिट टूनागा मोर्चे पर थी। 487 और टाइगर हिल के बीच के इलाके में मुश्किल डगर थी। समीर ने बताया कि कर्तव्य बोध का अहसास हौसला बढ़ाने वाला था। धमनियों में दौड़ रहा खून जीत का जोश पैदा कर रहा था। मुश्किलों की चोटी पर चढे़ और उसे फतेह किया। 
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कारगिल विजय दिवस - फोटो : अमर उजाला
भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस और पराक्रम को देखकर पाक सेना के छक्के छूट गए। कारगिल जंग की जीत के बाद मोटरें खींचकर दिल्ली लाई गईं थीं। यूनिट को तमाम पुरस्कार मिले, जिनमें महावीर चक्र भी शामिल है। वर्तमान में जम्मू कश्मीर के बारमूला में तैनात ब्रिगेडियर समीर भदौरिया ने कारगिल विजय की दास्तां बयां करने के साथ बताया कि उनके पिता कर्नल दलपति सिंह 1965, 1971 और श्रीलंका की लड़ाई में लडे़ थे। 
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कारगिल विजय दिवस
फौजी पिता से प्रेरित होकर सेना में भर्ती हुए समीर ने बताया कि उन्हें अपने गांव रुदमुली की बलिदानी माटी पर नाज है। इकलौता बेटा होने के बाद भी मां सरला भदौरिया ने सेना में भर्ती कराया। उन्होंने कहा कि गांव के हर घर का बेटा फौजी है। बेटी फौजी को ब्याही है। जब भी घर जाना होता है, बटेश्वर के मंदिर में घंटा जरूर चढ़ाते हैं।  ब्रिगेडियर समीर भदौरिया वर्ष 2008-09 में सूडान में यूएन मिशन पर रहे। उनके कमांड में सूडान के तीन स्टेट रहे थे।
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कर्नल सुखवीर सिंह - फोटो : अमर उजाला
बाह के गढ़वार गांव के कर्नल सुखवीर सिंह ने भी कारगिल की जंग लड़ी। उनके नेतृत्व में तोपखाना रेजीमेंट को युद्ध के मोर्चे पर लगाया गया था। पहली बार बोफोर्स तोपों से पाक द्वारा कब्जाई तोडोलिंग चौकी पर गोले दागे गए। बोफोर्स तोप के हमले में पाक सैनिकों के चिथडे़ आसमान में उड़कर जमीन पर गिरे। करीब 25-30 सैनिक ढेर होने पर पाक सेना मैदान छोड़कर भाग गई। भारतीय सेना ने अपनी जमीन जीत कर राष्ट्रीय ध्वज फहरा दिया। 
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