उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का कासगंज जिले से बेहद करीबी रिश्ता था। वह हमेशा समर्थकों के बीच कहते थे कि कासगंज उनका अपना घर है। जिले के लोगों का उनसे काफी लगाव था। जब भी वह यहां आते तो जानकारी मिलने पर लोग उनसे मिलने के लिए एकत्रित हो जाते थे। शनिवार रात को जैसे ही उनके निधन की खबर आई तो जिले में शोक की लहर दौड़ गई।
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कल्याण सिंह ने वर्ष 1993 में कासगंज विधानसभा से चुनाव लड़ा था और विजय प्राप्त की। उन्होंने 1993 में ही अतरौली विधानसभा से भी चुनाव लड़ा था। यहां से भी जीते। दो जगह से निर्वाचित होने के कारण उन्होंने कासगंज विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उपचुनाव हुआ और उन्होंने यहां रहकर उपचुनाव की बागडोर संभाली थी।
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पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह कासगंज में आना-जाना लगातार बना रहा। वह लोगों के सुख-दुख में शामिल होने के लिए यहां आते थे। मुख्यमंत्री के तौर पर भी उनका आगमन जिले में हुआ। राजस्थान के राज्यपाल रहते हुए भी वह कई बार यहां आए। शहर में आकर रुकते थे।
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पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ भाजपा नेता कुमकुम वार्ष्णेय
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भाजपा नेता कुमकुम वार्ष्णेय ने बताया कि हमेशा बाबूजी ने उन्हें बेटी के रूप में माना। उनके परिवार के सुख दुख में हमेशा ही शामिल हुए। कासगंज को हमेशा उन्होंने अपना घर माना। उनके राजनीति के आदर्श मूल्य सदैव लोगों के बीच रहेंगे।
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पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ पूर्व विधायक नेतराम सिंह
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पूर्व विधायक स्वर्गीय नेतराम सिंह के परिवार से भी उनके घनिष्ठ रिश्ते थे। जब 1993 में उन्होंने चुनाव लड़ा था तब पूर्व विधायक नेतराम सिंह ने अपनी सीट से चुनाव लड़ने को उन्हें आमंत्रित किया।
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पूर्व सीएम कल्याण सिंह के साथ डॉ.बीडी राणा
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पूर्व विधायक नेतराम सिंह के पुत्र डॉ. बीड़ी राणा, प्रवेंद्र राणा का कहना है कि बाबूजी का प्यार हमेशा उनके परिवार को मिला। बाबूजी का लगाव हमेशा यहां के लोगों से रहा। वह कहीं भी रहते थे ,लेकिन जब कासगंज से कोई पहुंच जाता तो उनके चेहरे पर अलग ही खुशी आती थी। वह सभी लोगों के हालचाल की जानकारी लेना नहीं भूलते थे।