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विजय दिवस: भारत-पाक युद्ध में फिरोजाबाद के दो होमगार्डों ने दिया था अदम्य साहस का परिचय, आज परिवारों है ये हाल

Fri, 17 Dec 2021 11:00 AM IST
Abhishek Saxena संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Published by: Abhishek Saxena Updated Fri, 17 Dec 2021 11:00 AM IST
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India Pakistan War In 1971 Firozabad Warrior Two Homegaurd Fights For Victory
फिरोजाबाद: होमगार्ड की फाइल तस्वीर और मेडल दिखाता परिवार - फोटो : अमर उजाला
भारत-पाकिस्तान के बीच हुए 1971 में युद्ध में फिरोजाबाद शहर के दो होमगार्डों ने अहम भूमिका निभाई थी। उन्हें अदम्य साहस के लिए तत्कालीन सरकार ने मेडल से नवाजा था। उस समय युद्ध में शामिल दोनों होमगार्डों की मौत हो चुकी है। हालांकि देश के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले दोनों बहादुरों के परिवार वर्तमान में तंग हाल में जीने को मजबूर हैं। जीवित रहते हुए दोनों ने मदद के लिए उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री को पत्र भेजा था। लेकिन शासन की अनदेखी के कारण होमगार्डों के परिवार आज भी मुफलिसी में जीवन जी रहे हैं। भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 में युद्ध हुआ था। इस दौरान युद्ध में दोनों ओर से 3900 जवान शहीद हुए और 9851 जवान घायल हो गए थे। हालांकि भारतीय फौज के अदम्य साहस के कारण पाक के 93 हजार जवानों ने आत्मसमर्पण किया था।
India Pakistan War In 1971 Firozabad Warrior Two Homegaurd Fights For Victory
होमगार्ड की फाइल तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तान को मिली हार के बाद उस समय के पूर्वी पाकिस्तान, जिसे वर्तमान में बांग्लादेश कहते हैं, को आजादी मिली थी। इस युद्ध में फिरोजाबाद के पैमेश्वर गेट निवासी शंकरलाल ने अपने साथी रामनगर निवासी राजकिशोर कुलश्रेष्ठ के साथ हिस्सा लिया था। 
India Pakistan War In 1971 Firozabad Warrior Two Homegaurd Fights For Victory
मेडल और सम्मान पत्र दिखाते परिवार वाले - फोटो : अमर उजाला
शंकरलाल के परिजनों ने बताया कि फौज में सैनिकों की कमी के चलते होमगार्डों को आगरा पुलिस लाइन में हथियार चलाने का प्रशिक्षण देकर युद्ध में भेजा गया था। इस युद्ध में प्रतिभाग करने के बाद दोनों लौटे तो उन्हें मेडल प्रदान किए गए थे। ये मेडल शंकरलाल के परिजनों के पास आज भी सुरक्षित हैं। हालांकि देश के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले बहादुरों के परिजनों को शासन की अनदेखी का सामना करना पड़ रहा है।

 
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संग्राम मेडल - फोटो : अमर उजाला
26 जनवरी 1999 को मुख्यमंत्री को भेजा था पत्र 
परिजनों के मुताबिक, शंकरलाल ने जीवित रहते हुए 26 जनवरी 1999 को प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भेजा था। इसमें स्पष्ट लिखा था कि 20 साल तक होमगार्ड विभाग में रहकर निशुल्क बिना किसी स्वार्थ के केवल खाना-खुराक पर उन्होंने सेवा की। देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत होकर 1971 भारत- पाक युद्ध में देश की ओर से हिस्सा लिया और जीत पाई।
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1971 के युद्ध के दौरान भारतीय सेना - फोटो : Twitter@adgpi

युद्ध के दौरान देश सेवा करने वाले जवानों की प्रदेश सरकार ने सुधि नहीं ली। वर्तमान में उनके परिवार में दो पुत्र सत्यप्रकाश एवं श्री कृष्ण चित्तौड़ी तथा दो बेटी प्रेमवती एवं विद्यादेवी हैं। शासन की अनदेखी के कारण उनका परिवार ईंट एवं गारे से बनाए गए पुराने मकान में जीवन जीने को मजबूर है। इससे पहले मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में मुख्यमंत्री के उपसचिव ने शंकरलाल के पत्र का जवाब भेजा था।
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