हिंदी में कालजयी रचानाओं ने जिसे महाकवि की उपाधि दिलाई, उन्हीं महाकवि देव की स्मृतियां गुमनामी में कैद हैं। उनकी रचनाएं भी देव स्मारक की अलमारियों में तन्हाई की सजा काट रही हैं। उनमें दीमक लग चुकी है। प्रशासन की अनदेखी के चलते हिंदी के विकास में अपना जीवन न्यौछावर करने वाले एक महाकवि देव की स्मृतियां अब दम तोड़ रही हैं, लेकिन किसी को इनकी परवाह नहीं है। हिंदी दिवस पर अपने कवि का ऐसा अपमान देख हिंदी भी उदास है।
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हिंदी दिवस 2022: गुमनामी में कैद महाकवि देव की स्मृतियां, रचनाओं को मिली तन्हाई की सजा
Wed, 14 Sep 2022 01:39 PM IST
मुकेश कुमार
ज्योत्यवेंद्र दुबे, अमर उजाला मैनपुरी
ज्योत्यवेंद्र दुबे, अमर उजाला मैनपुरी
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 14 Sep 2022 01:39 PM IST
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महाकवि देव स्मारक
- फोटो : अमर उजाला
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स्मारक में रखीं महाकवि देव की रचनाएं
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने एक के बाद एक 72 कालजयी ग्रंथों की रचना की, जो हिंदी साहित्य में अमर हो गए। हालांकि वर्तमान में उपलब्धता केवल 15 ग्रंथों की ही है। इसी लेखन और हिंदी के योगदान ने उन्हें महाकवि का दर्जा दिलाया और देवदत्त से वे महाकवि देव बन गए। 95 साल की आयु तक उन्होंने लेखन जारी रखा, लेकिन हिंदी के चमकते सितारे महाकवि देव की स्मृतियां आज गुमनामी में कैद हैं। वहीं उनकी कालजयी कही जाने वाली रचनाएं कुसमरा में बने देव स्मारक की अलमारियों में तन्हाई की सजा काट रही हैं।
कुसमरा में स्थित महाकवि देव का स्मारक
- फोटो : अमर उजाला
69 साल से लोकार्पण की बाट जोह रहा स्मारक
महाकवि देव की याद में कुसमरा में 1953 में एक देव स्मारक का निर्माण कराया गया था। इसका शिलान्यास तत्कालीन राज्यपाल केएम मुंशी ने किया था, लेकिन आज तक इसका लोकार्पण नहीं हो सका। धीरे-धीरे जब स्मारक जर्जर हो गया तो इसका जीर्णोद्धार भी सरकार ने कराया। सपा शासन काल में 2013-14 में सरकार ने 15 लाख रुपये की धनराशि से इसका जीर्णोद्धार कार्य हुआ, लेकिन इसके बाद भी इसका लोकार्पण नहीं हो सका। धीरे-धीरे फिर भवन जर्जर होने लगा है।
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महाकवि देव के वंशज
- फोटो : अमर उजाला
परिजनों को खटकता है रीतिकाल के महाकवि का अपमान
महाकवि देव की नौवीं पीढ़ी के वंशज नित्यानंद दुबे वर्तमान में कुसमरा में ही निवास करते हैं। उन्हें रीतिकाल के महाकवि कहे जाने वाले देव का अपमान खटकता है। वे कहते हैं उनके वंशज महाकवि देव ने हिंदी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, लेकिन आज तक शासन और प्रशासन ने उनका सम्मान नहीं किया। हिंदी दिवस हो या फिर जयंती कभी प्रशासन ने न तो उन्हें याद किया और न ही कोई सम्मान दिया।
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कुसमरा में स्थित महाकवि देव का स्मारक
- फोटो : अमर उजाला
महाकवि की रचनाएं जो उपलब्ध हैं
- भाव विलास- अष्टयाम
- भवानी विलास
- प्रेम तरंग
- कुशल विलास
- जाती विलास
- रस विलास
- सुजान विनोद
- प्रेमचंद्रिका
- शब्द रसायन
- रागरत्नाकर
- देव चरित्र
- देवमाया प्रपंच
- देवशतक
- सुखसागर तरंग