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बजट अधिवेशन में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन घोटाला पर जबरदस्त हंगामा, राज्यमंत्री ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
Thu, 25 Jun 2020 12:11 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 25 Jun 2020 12:11 PM IST
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बजट अधिवेशन के दौरान मेयर नवीन जैन
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा नगर निगम सदन के बुधवार को सूरसदन में हुए बजट अधिवेशन में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन घोटाले में पांच कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने में देरी और अधिकारियों को बचाने का मामला छाया रहा। राज्य मंत्री, सांसद और विधायकों ने नगर निगम के अधिकारियों पर कार्रवाई न करने की मंशा पर सवाल खड़े किए, वहीं पार्षदों ने भी अवमानना के आरोपी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए 40 मिनट तक हंगामा किया। मेयर के जवाब से सदन असंतुष्ट रहा लेकिन बाद में माहौल देख मेयर ने कहा कि एफआईआर के बाद पुलिस कार्रवाई करेगी और घोटाले के आरोपी जेल भेजे जाएंगे।
बजट अधिवेशन में मुद्दा उठाते भाजपा विधायक योगेंद्र उपाध्याय
- फोटो : अमर उजाला
सूर सदन में हुए बजट अधिवेशन में 660 करोड़ रुपये का नगर निगम का बजट रखने से पहले पूर्व में हुए अधिवेशनों के कार्यवृत्त की पुष्टि करनी थी, लेकिन उससे पहले ही उनमें में लिए गए फैसलों के लागू न होने पर विधायकों ने सवाल खड़े कर दिए। विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने डोर-टू-डोर कूड़ा घोटाले में 5 महीने बाद कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मंशा पर सवाल खड़े किए, जबकि सदन ने 3 दिन में एफआईआर करने के लिए नगर आयुक्त को निर्देश दिए थे। विधायक ने पूछा कि किसी अफसर के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
बजट अधिवेशन में सांसद प्रो एसपी सिंह बघेल
- फोटो : अमर उजाला
सांसद प्रो एसपी सिंह बघेल ने मेयर को याद दिलाया कि सदन ने तय किया था कि पर्यावरण अभियंता, जेडएसओ पर कार्रवाई के साथ कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने और पैसा वापस करने के निर्देश दिए गए थे लेकिन मिनट्स भी गलत लिखे गए। एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई, इससे मेयर खुद देखें।
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बजट अधिवेशन में डॉ. जीएस धर्मेश राज्यमंत्री
- फोटो : अमर उजाला
नगर आयुक्त झांसी में तैनात रहे हैं, वहीं की कंपनियों को ठेका क्यों?
नगर आयुक्त समेत दो अधिकारी झांसी में तैनात रहे हैं। पांच में से चार कंपनियां झांसी की है। आखिर झांसी की कंपनियों को क्यों काम दिया गया? कंपनियों और नगर आयुक्त के बीच में क्या संबंध है, इसकी भी जांच होनी चाहिए -डॉ. जीएस धर्मेश राज्यमंत्री
नगर आयुक्त समेत दो अधिकारी झांसी में तैनात रहे हैं। पांच में से चार कंपनियां झांसी की है। आखिर झांसी की कंपनियों को क्यों काम दिया गया? कंपनियों और नगर आयुक्त के बीच में क्या संबंध है, इसकी भी जांच होनी चाहिए -डॉ. जीएस धर्मेश राज्यमंत्री
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बजट अधिवेशन में विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल
- फोटो : अमर उजाला
सदन ने जब तय कर दिया कि एफआईआर होगी और अधिकारियों के नाम के साथ कार्रवाई होगी लेकिन किसी भी अधिकारी का नाम एफआईआर में नहीं है। उन्हें बचाने की कोशिश क्यों की जा रही है जो अधिकारी दोषी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्हें बचाया ना जाए - पुरुषोत्तम खंडेलवाल विधायक