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अकबर के नाम पर उत्तर भारत का पहला चर्च, खुद में समेटे है 400 वर्षों का इतिहास

Tue, 25 Dec 2018 10:34 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 25 Dec 2018 10:34 AM IST
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four century old historical akbari church in agra
अकबरी चर्च - फोटो : अमर उजाला
उत्तर भारत में पहली बार क्रिसमस पर ‘जिंगल बेल’ के स्वर ताजनगरी में गूंजे थे। कई एतिहासिक घटनाओं के साक्षी आगरा में हिंदू, मुस्लिम और सिख धर्म के कई पवित्र स्थान तो हैं ही, उत्तर भारत का पहला चर्च भी यहीं बनवाया गया था। सम्राट अकबर ने अपनी पत्नी मरियम के प्रार्थना करने के लिए इसे बनवाया था। अकबरी चर्च के नाम से जाने गए इस चर्च में शहर का पहला क्रिसमस आयोजन हुआ था।

अकबर के नाम पर उत्तर भारत का पहला चर्च, खुद में समेटे है 400 वर्षों का इतिहास

four century old historical akbari church in agra
अकबरी चर्च - फोटो : अमर उजाला
मुगल सम्राट अकबर के आग्रह पर फादर जुसुइट ने वजीरपुरा में सन् 1599-00 में यह चर्च बनवाना शुरू किया। यह चर्च कई बार ध्वस्त भी हुआ। बाद में फिर से निर्माण किया गया। जहांगीर की ईसाई धर्म के प्रति आस्था थी, लेकिन पुर्तगालियों से मतभेद होने पर 1615 में इसे तुड़वा दिया। एक साल बाद इसमें आग भी लग गई। 

अकबर के नाम पर उत्तर भारत का पहला चर्च, खुद में समेटे है 400 वर्षों का इतिहास

four century old historical akbari church in agra
अकबरी चर्च - फोटो : अमर उजाला
एक बार फिर 1636 में शाहजहां ने चर्च को बनवाया। 1748 में पार्सियन आक्रमणकारी अहमद शाह अब्दाली ने इस चर्च को नुकसान पहुंचाया। बाद में इसकी मरम्मत हुई और माता मरियम के नाम समर्पित किया गया। अब भले ही कई और चर्च बन गए हों, लेकिन इसका एतिहासिक महत्व के चलते ईसाई समाज के लिए ये खास बना हुआ है। 
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अकबर के नाम पर उत्तर भारत का पहला चर्च, खुद में समेटे है 400 वर्षों का इतिहास

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माता निष्कलंक गिरिजाघर
माता निष्कलंक गिरिजाघर 
वजीपुरा में बने निष्कलंक माता के गिरिजाघर का निर्माण 1848 में हुआ। इसे इटली के बिशप बोर्गी ने बनवाया था। यह गिरिजाघर इटली वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है। शहर के प्रमुख गिरिजाघरों में से एक है। इस गिरिजाघर में 1910 में इटली से लाए गए दो घंटे लगाए गए हैं। माता मरियम की बड़ी मूर्ति बनी हुई है। चर्च में क्रिसमस पर भव्य आयोजन होता है। 
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सेंट मेरीज चर्च
सेंट मेरीज चर्च 
अजमेर रोड पर प्रतापपुरा में बना सेंट मैरीज चर्च का निर्माण 1920 में शुरू हुआ। पांच अप्रैल, 1923 को यह बनकर तैयार हुआ। इसका निर्माण जॉन फर्म के प्रसिद्ध जॉन परिवार की ओर से बनवाया गया था। सर जॉन की पत्नी मैरी जोन की स्मृति में इसका निर्माण हुआ था। पहले यह चर्च सर्वोत्तम परामर्शदात्री मदर मेरी को समर्पित था। 1968 में हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड कर्मचारियों के आग्रह पर तत्कालीन महाधर्माध्यक्ष डॉ. डॉमिनिक अथॉड ने स्वास्थ्य की माता मरियम के नाम इस चर्च को समर्पित कर दिया। 
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