ताजमहल के शहर आगरा में एक तरफ पानी के लिए जिंदगानी को जूझना पड़ता है, वहीं दूसरी तरफ हर रोज हजारों लीटर पानी सड़क पर बहकर बर्बाद हो जाता है। दरअसल, जीवनी मंडी और सिकंदरा वाटरवर्क्स से जुड़े पाइपलाइन नेटवर्क के पाइप जर्जर हो चुके हैं। जर्जर और गले हुए पाइपों के कारण एक साल (वर्ष 2020) में 50 करोड़ लीटर पानी सड़क पर बहकर बर्बाद हो गया। सिंचाई विभाग के सेवानिवृत्त अभियंता अशोक प्रकाश ने अध्ययन कर यह अनुमान लगाया है। इस पानी से शहर में तीन दिन आपूर्ति की जा सकती थी। यह 27.77 लाख लोगों की एक दिन की जरूरत का पानी है। ताजनगरी में फिलहाल 9-10 लाख लोगों को ही जलकल की पाइपलाइन से पानी उपलब्ध हो रहा है। बाकी शहर की जलापूर्ति सबमर्सिबल पंप और ट्यूबवेल पर निर्भर हैं।
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अमर उजाला पड़ताल: आगरा में एक साल में बर्बाद हो गया 50 करोड़ लीटर पानी, परेशान रही 'जिंदगानी'
Fri, 05 Feb 2021 10:31 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 05 Feb 2021 10:31 AM IST
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आगरा: पाइपलाइन में लीकेज होने से फव्वारा की तरह निकलता पानी
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा किले के पास पाइपलाइन टूटने से बहा पानी
- फोटो : अमर उजाला
संकट : 130 साल पुरानी पाइप लाइनें जर्जर
ताजनगरी में जीवनी मंडी वाटरवर्क्स की स्थापना 1888 में हुई थी। तभी जीवनी मंडी से पुराने शहर के लिए मेन राइजिंग लाइन बिछाई गई थीं। ब्रिटिश काल की पुरानी पाइपलाइनें अब जर्जर हो चुकी हैं, जिसमें बीते साल में 3955 लीकेज से पानी बर्बाद होता रहा। जलकल विभाग ने इन लीकेज की मरम्मत की, लेकिन लोगों की मुसीबतें फिर भी कम नहीं हुई।
130 साल पुरानी लाइनों के जर्जर होने के कारण इनमें हर दिन औसतन 11 से 12 लीकेज की मरम्मत कराने की नौबत आ रही है। मरम्मत के बाद भी पाइपलाइन लीकेज का सिलसिला जारी है। शहर में बीते साल जवाहरपुल, छीपीटोला, जीवनी मंडी, मंटोला नाला, कमला नगर, सुल्तानगंज पुलिया, शाहगंज-बोदला, कैलाशपुरी, मानसिक चिकित्सालय के पास के लीकेज को ठीक करने के साथ पाइपलाइन बदलने का काम किया गया, लेकिन पानी का संकट अब भी दूर नहीं हुआ।
ताजनगरी में जीवनी मंडी वाटरवर्क्स की स्थापना 1888 में हुई थी। तभी जीवनी मंडी से पुराने शहर के लिए मेन राइजिंग लाइन बिछाई गई थीं। ब्रिटिश काल की पुरानी पाइपलाइनें अब जर्जर हो चुकी हैं, जिसमें बीते साल में 3955 लीकेज से पानी बर्बाद होता रहा। जलकल विभाग ने इन लीकेज की मरम्मत की, लेकिन लोगों की मुसीबतें फिर भी कम नहीं हुई।
130 साल पुरानी लाइनों के जर्जर होने के कारण इनमें हर दिन औसतन 11 से 12 लीकेज की मरम्मत कराने की नौबत आ रही है। मरम्मत के बाद भी पाइपलाइन लीकेज का सिलसिला जारी है। शहर में बीते साल जवाहरपुल, छीपीटोला, जीवनी मंडी, मंटोला नाला, कमला नगर, सुल्तानगंज पुलिया, शाहगंज-बोदला, कैलाशपुरी, मानसिक चिकित्सालय के पास के लीकेज को ठीक करने के साथ पाइपलाइन बदलने का काम किया गया, लेकिन पानी का संकट अब भी दूर नहीं हुआ।
आगरा: पाइपलाइन से निकलता पानी
- फोटो : अमर उजाला
समस्या : जीवनी मंडी के पास लीकेज ज्यादा
पानी की जर्जर पाइपलाइनों के लीकेज और गले हुए पाइपों के पीस बदलवाने पर जलकल विभाग ने वर्ष 2020 में पांच करोड़ रुपये खर्च किए हैं। जलकल विभाग के पूर्व सचिव अनवर ख्वाजा के मुताबिक जीवनी मंडी के पास की पाइपलाइनें जलकल स्थापना के समय की हैं। उनकी हालत ज्यादा खराब है। उनके लीकेज ही ज्यादा होते हैं। सालाना लगभग 5 करोड़ रुपये का बजट मरम्मत के लिए है। 28 इंच की लाइनों में लीकेज ज्यादा हुए हैं। जवाहरपुल, जीवनी मंडी, कैलाशपुरी पर लाइनें जर्जर हो चुकी हैं।
पानी की जर्जर पाइपलाइनों के लीकेज और गले हुए पाइपों के पीस बदलवाने पर जलकल विभाग ने वर्ष 2020 में पांच करोड़ रुपये खर्च किए हैं। जलकल विभाग के पूर्व सचिव अनवर ख्वाजा के मुताबिक जीवनी मंडी के पास की पाइपलाइनें जलकल स्थापना के समय की हैं। उनकी हालत ज्यादा खराब है। उनके लीकेज ही ज्यादा होते हैं। सालाना लगभग 5 करोड़ रुपये का बजट मरम्मत के लिए है। 28 इंच की लाइनों में लीकेज ज्यादा हुए हैं। जवाहरपुल, जीवनी मंडी, कैलाशपुरी पर लाइनें जर्जर हो चुकी हैं।
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कृष्णा कॉलोनी में पानी की पाइपलाइन में लीकेज (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
इन जगहों पर ज्यादा जर्जर हैं लाइनें
- जीवनी मंडी वाटरवर्क्स गेट मंदिर के पास
- जीवनी मंडी वाटरवर्क्स यमुना की तलहटी
- जीवनी मंडी पेट्रोल पंप के सामने
- कृष्णा कॉलोनी के पास यमुना के किनारे
- शाहगंज-बोदला रोड पर मेन फीडर
- आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर
- बल्केश्वर, लोहिया नगर, कमला नगर
- ट्रांसयमुना कॉलोनी, प्रकाश नगर
- स्ट्रैची ब्रिज और जवाहरपुल की लाइन
- रिंग रोड, विजय नगर, लंगड़े की चौकी
- जीवनी मंडी वाटरवर्क्स गेट मंदिर के पास
- जीवनी मंडी वाटरवर्क्स यमुना की तलहटी
- जीवनी मंडी पेट्रोल पंप के सामने
- कृष्णा कॉलोनी के पास यमुना के किनारे
- शाहगंज-बोदला रोड पर मेन फीडर
- आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर
- बल्केश्वर, लोहिया नगर, कमला नगर
- ट्रांसयमुना कॉलोनी, प्रकाश नगर
- स्ट्रैची ब्रिज और जवाहरपुल की लाइन
- रिंग रोड, विजय नगर, लंगड़े की चौकी
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पानी की पाइपलाइन में लीकेज (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
स्पष्टीकरणः पाइपलाइनें जर्जर हैं, लीकेज तो होंगे ही
सवाल : लीकेज कभी बंद होंगे या नहीं, आखिर जल निगम कर क्या रहा है?
जवाब : जीवनी मंडी वाटरवर्क्स बने 130 साल हो गए। उसी समय की अधिकतर लाइनें हैं। मियाद खत्म हो चुकी है। इसलिए इतने लीकेज हो रहे हैं।
सवाल : तो क्या यह मान लिया जाए कि महकमा कुछ कर ही नहीं पाएगा?
जवाब : जैसे-तैसे हम सप्लाई दे रहे हैं। नई लाइनें बिछेंगी, तब लीकेज बंद होंगे। एक जगह लीकेज बंद करते हैं तो दूसरी जगह से हो जाती है।
सवाल : रोज हजारों लोगों को पानी नहीं मिल रहा, इसके लिए कोई तो जिम्मेदार होगा?
जवाब : हमारी मजबूरी है, अगर प्रेशर कम रखें तो पानी नहीं मिलेगा, ज्यादा रखें तो लाइन फट जाती है। जिम्मेदार किसे मानें, हम खुद परेशान हैं।
- आरएस यादव, महाप्रबंधक, जलकल
सवाल : लीकेज कभी बंद होंगे या नहीं, आखिर जल निगम कर क्या रहा है?
जवाब : जीवनी मंडी वाटरवर्क्स बने 130 साल हो गए। उसी समय की अधिकतर लाइनें हैं। मियाद खत्म हो चुकी है। इसलिए इतने लीकेज हो रहे हैं।
सवाल : तो क्या यह मान लिया जाए कि महकमा कुछ कर ही नहीं पाएगा?
जवाब : जैसे-तैसे हम सप्लाई दे रहे हैं। नई लाइनें बिछेंगी, तब लीकेज बंद होंगे। एक जगह लीकेज बंद करते हैं तो दूसरी जगह से हो जाती है।
सवाल : रोज हजारों लोगों को पानी नहीं मिल रहा, इसके लिए कोई तो जिम्मेदार होगा?
जवाब : हमारी मजबूरी है, अगर प्रेशर कम रखें तो पानी नहीं मिलेगा, ज्यादा रखें तो लाइन फट जाती है। जिम्मेदार किसे मानें, हम खुद परेशान हैं।
- आरएस यादव, महाप्रबंधक, जलकल