दुनिया के चर्चित हाथियों में से एक 'राजू' ने चार जुलाई को अपनी आजादी के छह साल पूरे कर लिए। यह हाथी कई वर्षों तक जंजीरों में जकड़ा रहा। जब आजाद हुआ तो उसके आंसू छलक पड़े थे। मथुरा के फरह स्थित हाथी संरक्षण केंद्र में शनिवार को 'राजू' की आजादी की छठी वर्षगांठ मनाई गई। अगली स्लाइड्स में पढ़िए 'राजू' के साथ क्ररूता की कहानी....
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छह साल पहले की तस्वीर
- फोटो : Wildlife SOS
यह हाथी 50 वर्षों तक बेड़ियों में जकड़ा रहा। चार जुलाई 2014 को वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम ने छह साल पहले प्रयागराज से उसे मुक्त कराया था। उस वक्त 'राजू' दुनियाभर में सुर्खियां बना था। एसओएस की टीम के सदस्यों ने उसके थके और जख्मी पैरों के चारों ओर से भारी नुकीली जंजीरों को हटाया था। इसके बाद उसे हाथी संरक्षण केंद्र लाया गया, जहां उसका उपचार हुआ और 'राजू' नाम दिया गया।
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राजू की आंखों से निकलते आंसू
- फोटो : Wildlife SOS
संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि 'राजू' को बचपन में ही अपने झुंड से अलग कर दिया गया। जिसके बाद उसे ‘फजान’ जैसी क्रूर प्रशिक्षण प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, जिसका उद्देश्य हाथियों की आत्मा और हौसले को चकनाचूर करना था। उसके शरीर और पैरों पर चोट व घाव के गंभीर निशान थे, जो कि उसके साथ हुई क्रूरता को बयां कर रहे थे।
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राजू को तरबूज खिलाता कर्मचारी
- फोटो : Wildlife SOS
संस्था के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि राजू की हालत में सुधार एक धीमी और स्थिर प्रक्रिया है। उसके घावों में पिछले कुछ वर्षों में काफी सुधार हुआ है। उसे धीरे-धीरे यह एहसास भी हो रहा है कि वो जंजीरों से मुक्त हैं। राजू एक बहुत ही शांत हाथी है, जो अपने बाड़े में पूल में खाना और खेलना पसंद करता है।
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हाथी संरक्षण केंद्र में राजू
- फोटो : WildlifeSOS
वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी ने कहा कि हमें खिशी है कि हम राजू को प्यार और देखभाल प्रदान करने में सक्षम रहे, जिसकी उसे दशकों की उपेक्षा के बाद सख्त जरूरत थी। संस्था के पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों की देखभाल और उपचार से राजू के आत्मविश्वास और ताकत को वापस हासिल करने में मदद की है।