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राधाष्टमी: बरसाने बजी बधाई कीरत ने कन्या जाई...ब्रज में दिखी राधा जन्म की धूम

Wed, 26 Aug 2020 07:05 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 26 Aug 2020 07:05 PM IST
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Celebrations In Mathura Of Radharani Birth
राधा अष्टमी के मौके पर रावल में पंचामृत किया गया - फोटो : अमर उजाला
राधारानी के जन्मोत्सव पर लाडलीजी मंदिर बधाइयों और वेद की ऋचाओं से गूंज उठा। गर्भ गृह में घंटे-घड़ियाल बजने लगे। गर्भगृह से उठीं ध्वनि प्राचीन भवन की प्राचीरों से टकराती हुई वातावरण में आस्था की हिलोरें भर रही थीं। मूल नक्षत्र में जन्मी राधारानी का बुधवार को चार बजे अभिषेक हुआ। 

 
Celebrations In Mathura Of Radharani Birth
बरसाना में भक्तों से सूना राधारानी का मंदिर - फोटो : अमर उजाला
कीरत नंदनी के जन्म के साथ ही बृजाचार्य नारायन भट्ट द्वार प्राकट्य विग्रह को चांदी की चौकी पर विराजमान कर आचार्यों ने वेद मंत्रों का उच्चारण किया। एक टन दूध व ढाई कुंतल दही, 20 किलो शहद, आधा किलो इत्र, बूरा, 27 पेड़ों की पत्तियों, 27 जगह की रज, 27 कुओं का जल, सप्त अनाज, सात मेवा, सात फल से वृषभान नंदनी के विग्रह का अभिषेक किया। आचार्यों ने नवग्रह देवताओं का आह्वान किया।
Celebrations In Mathura Of Radharani Birth
ब्रह्मांचल पर्वत पर विराजमान लाडलीजी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
श्रीविग्रह को यमुनाजल से स्नान कराया। पुष्पों की वर्षा के साथ सुबह छह बजे महाआरती हुई। मुखिया रामभरोसे गोस्वामी के नेतृत्व में बधाइयों का गायन हुआ। इसमें दाई, मान, सवासनी, नाईन, नामकरण आदि लीलाओं के पद गाए गए। सीताराम मंदिर, गोपालजी मंदिर, राधारस मंदिर, जयपुर मंदिर, मानगढ़, मोरकुटी, दानगढ़, लाड़िलीजी मंदिर, महीभानजी मंदिर, अष्टसखी मंदिर, वृषभानजी मंदिरों में राधाजी का जन्माभिषेक किया गया। मंदिर में आयोजित दधिकांधा में नंदगांव और बरसाना वासियों ने संयुक्त रूप से वृषभान के हो आंगन मंगल भीर, देश-देश के भिक्षुक आए बधाई पद प्रस्तुत किया गया। जन्म के बाद लाड़लीजी मंदिर में प्रात: प्राकट्य विग्रह की शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई।राधारानी ने मंदिर प्रांगण में स्थित सफेद संगमर की छतरी से भक्तों पर अपनी कृपा का सागर उड़ेला। सेवायतों की शादीशुदा लड़की ने आरता किया। 
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Celebrations In Mathura Of Radharani Birth
श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में राधारानी के विग्रह का किया गया पंचामृत अभिषेक - फोटो : अमर उजाला
श्रीकेशवदेव ने श्रीराधा रूप में भक्तों को मनोहारी दर्शन
श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में श्रीराधा जन्म महोत्सव शास्त्रों की मर्यादाओं, परंपराओं के अनुरूप श्रद्धाभाव से मनाया गया। श्रीराधा जन्माष्टमी के अवसर पर श्रीकेशवदेव जी के अलौकिक श्रीविग्रह ने स्वयं श्रीराधा रूप में भक्तों को मनोहारी दर्शन दिए। श्रीराधा जन्माष्टमी का मुख्य आयोजन प्रात: 8 बजे  श्रीगणेष, नवग्रह आदि पूजन के बाद शुरू हुआ। सर्वप्रथम श्रीराधा स्वरूप में विराजित भगवान श्रीकेशवदेव जी के सन्मुख श्रीकीरत-किशोरी के चल विग्रह का श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा एवं प्रबंध समिति के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, मंदिर के पूजाचार्य विंधेश्वरी प्रसाद अवस्थी, ब्रह्मानंद मिश्रा, आचार्य महेश चंद शर्मा, सनातन पंडा सनातन पंडा द्वारा शास्त्रीय मर्यादाओं व परंपराओं के अनुरूप दिव्य जन्ममहाभिषेक कार्यक्रम संपूर्ण कराया। उद्दाम संकीर्तन व वैदिक मंत्रों के साथ हुए श्रीराधा जन्ममहाभिषेक के दर्शन के लिए मंदिर के बहुत कम भक्त मौजूद रहे। श्रीकृष्ण संकीर्तन मंडल, जन्मस्थान के भक्तों ने श्रीकेशवदेव मंदिर से संकीर्तन के मध्य चाव भागवत-भवन में विराजित श्रीराधाकृष्ण युगल-सरकार को अर्पित की।
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राधारानी के गांव रावल में हुआ विग्रह का पंचामृत अभिषेक - फोटो : अमर उजाला
राधारानी के गांव रावल में बुधवार को राधारानी का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इस बार बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर में प्रवेश नहीं था, उनकी आस्था मंदिर के गेट तक ही खींच लाई और गेट पर ही अपनी आराध्य राधारानी के जन्मोत्सव की खुशी में भजन गाते रहे। सुबह साढ़े चार बजे मंगला आरती के दर्शन हुए। आरती के बाद घंटे और घड़ियाल बजने लगे। जन्म के साथ ही राधारानी के श्री विग्रह को चांदी की चौकी पर विराजमान किया गया। इसके बाद मंदिर के पुजारियों द्वारा साढ़े पांच बजे मंत्रोच्चारण के मध्य सवा सौ किलो दूध, दही, घी, शहद, बूरा आदि से अभिषेक किया गया। महाभिषेक आरती की गई। सुबह 8:30 बजे शृंगार के दर्शन हुए। लाडली को माखन मिश्री, दूध का भोग लगाया गया। 11 बजे छप्पन भोग के दर्शन के बाद 12:30 राजभोग आरती का आयोजन हुआ। 
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