आगरा के ताज पूर्वी गेट एलिवेटिड मेट्रो स्टेशन से ताजमहल का खूबसूरत नजारा दिखाई देगा। प्लेटफार्म आकार ले रहा है। एलिवेटिड सेक्शन में बसई तक यू गर्डर रखे जा चुके हैं। अब फतेहाबाद स्टेशन तक कॉरिडोर निर्माण शुरू होगा।
ताजनगरी में मेट्रो का तीन तरफ काम शुरू हो गया है। एक तरफ फतेहाबाद रोड पर तीन मेट्रो स्टेशन बन रहे हैं। करीब 273 करोड़ रुपये खर्च होंगे। दूसरी तरफ पीएसी मैदान में डिपो तैयार हो रही है। वहीं ताजमहल, आगरा किला और जामा मस्जिद भूमिगत स्टेशन के लिए सर्वे शुरू हो गया है।
ताजपूर्वी गेट स्टेशन के प्लेटफार्म से ताजमहल नजर आने लगा है। मेट्रो प्रोजेक्ट डायरेक्टर अरविंद राय ने बताया कि प्लेटफार्म का निर्माण शुरू हो गया है। पहले चरण में छह स्टेशन के बीच मेट्रो ट्रायल होगा। एलिवेटिड सेक्शन में पाइलिंग, पिलर खड़े हो चुके हैं। कॉरिडोर को एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक जोड़ने के लिए यू गर्डर की कास्टिंग बमरौली कटारा में हो रही है।
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आगरा मेट्रो का मैप
- फोटो : अमर उजाला
दो साल में बनेंगे तीन भूमिगत स्टेशन
ताजमहल से जामा मस्जिद तक तीन भूमिगत स्टेशन 2024 तक तैयार करने का लक्ष्य है। एफकॉन व सेम इंडिया दोनों कंपनियां इन तीन सहित कुल सात स्टेशन का निर्माण करेंगी। इसके लिए 1820 करोड़ रुपया लागत आएगी।
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आगरा मेट्रो
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक कुमार केशव का कहना है कि लखनऊ और कानपुर की तरह आगरा में मेट्रो प्रोजेक्ट निर्धारित समय में पूरा किया जाएगा। परियोजना निदेशक अरिवंद राय ने बताया कि दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों ने ताजमहल से जामा मस्जिद तक सुरंग व स्टेशन निर्माण के लिए सर्वे शुरू कर दिया है।
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आकार ले रहा ताज पूर्वी गेट स्टेशन
- फोटो : अमर उजाला
दूसरे कॉरिडोर का तैयार होगा डिजाइन
सिकंदरा से ताजपूर्वी गेट तक 14 किमी. लंबा पहला कॉरिडोर बनेगा। जिसमें दस स्टेशन के निर्माण का रास्ता साफ हो चुका है। उधर, कालिंदी विहार से आगरा कैंट रेलवे स्टेशन तक प्रस्तावित 15 किमी. लंबे दूसरे कॉरिडोर का डिजाइन सर्वे की कवायद भी शुरू हो गई है। दूसरा कॉरिडोर की डिजाइन सर्वे पर करीब 34 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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आगरा मेट्रो रेल
- फोटो : अमर उजाला
ताजमहल से आरबीएस कॉलेज तक 7.93 किमी लंबी सुरंग में सात भूमिगत स्टेशन बनेंगे। आचार संहिता खत्म होने के बाद 20 मार्च से निर्माण शुरू हो सकता है। मेट्रो प्रोजेक्ट डायरेक्टर अरविंद राय ने बताया कि सुरंग कहां खोदी गई। कब स्टेशन बन गए। किसी को पता नहीं चलेगा।