आगरा जिले के बाह क्षेत्र में फैली एशिया की सबसे बड़ी घड़ियाल सेंक्चुअरी में घड़ियालों की नेस्टिंग शुरू हो गई है। वन विभाग का अमला घड़ियालों के बनाए घोंसलों के स्थान खोज कर अंडों की सुरक्षा के लिए जाली लगाने में जुटा है। जीपीएस से इनकी स्थिति पता लगाई जाएगी।
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आगरा : एशिया की सबसे बड़ी घड़ियाल सेंक्चुअरी में घड़ियालों ने दिए अंडे, सुरक्षा के लिए लगाई जा रही जाली
Sun, 24 Apr 2022 12:04 AM IST
मुकेश कुमार
संवाद न्यूज एजेंली, आगरा
संवाद न्यूज एजेंली, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 24 Apr 2022 12:04 AM IST
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चंबल की रेत में घड़ियालों के अंडे
- फोटो : अमर उजाला
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चंबल नदी किनारे रेत में घड़ियाल
- फोटो : अमर उजाला
दुनियाभर में घड़ियालों की प्रजाति संकटग्रस्त जीवों की सूची में है। घड़ियालों की 80 फीसदी आबादी चंबल नदी में मौजूद है। चंबल नदी में वर्ष 1979 से घड़ियालों का संरक्षण हो रहा है। हर साल इनकी गणना होती है।
चंबल में मगरमच्छ
- फोटो : अमर उजाला
मगरमच्छ की भी नेस्टिंग
घड़ियाल के साथ मगरमच्छ की नेस्टिंग भी शुरू हो गई है। रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि चंबल नदी किनारे और टापू की बालू पर विचरण करने वाली मादा मगरमच्छ पर वन विभाग नजर रख रहा है। मगरमच्छ के घोंसलों की सुरक्षा का इंतजाम किया जाएगा।
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चंबल में मगरमच्छ और घड़ियाल
- फोटो : अमर उजाला
मगरमच्छ का कुनबा भी चंबल नदी में तेजी से बढ़ रहा है। वार्षिक गणना रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में 454, 2017 में 562, 2018 में 613, 2019 में 706, 2020 में 710, 2021 में 882 मगरमच्छ चंबल नदी में मिले थे।
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