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तस्वीरों में देखें तड़पते रहे मरीज, हड़ताल पर रहे 'धरती के भगवान'
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Mon, 26 Mar 2018 11:29 AM IST
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परेशान महिला
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की 12 घंटे की हड़ताल से प्राइवेट चिकित्सकीय सेवा चरमरा गई। डॉक्टरों ने क्लीनिक बंद रखे, जो खुले थे उस पर ‘नो वर्क’ का बोर्ड लटका हुआ था। इलाज के लिए मरीज भटकते रहे। ऐसे में जिनकी हालत गंभीर रही, उन्होंने एसएन इमरजेंसी का रुख किया। शाम छह बजे के बाद सेवाएं बहाल हो गई।
नहीं मिला इलाज
- फोटो : अमर उजाला
नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के विरोध में आईएमए ने सुबह छह से शाम छह बजे तक हड़ताल का ऐलान किया। ऐसे में डॉक्टरों ने रविवार को अपने क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब, एक्सरे-अल्ट्रासाउंड सेंटर खोले ही नहीं। क्लीनिक पर पहुंचे मरीजों को इलाज नहीं मिला। किसी और से इलाज के लिए दूसरे डॉक्टर के पास गए, लेकिन यहां भी ऐसा ही हाल था।
बंद क्लीनिक
- फोटो : अमर उजाला
जिन मरीजों की हालत गंभीर थी, उनको भी अस्पताल में भर्ती करने से बचते रहे। दूरदराज से आए मरीज हड़ताल खुलने का इंतजार करते रहे तो कोई एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में इलाज के लिए पहुंचा। शाम छह बजे हड़ताल खत्म होने के बाद ही मरीजों को राहत मिली। आईएमए अध्यक्ष डॉ. रविंद्र मोहन पचौरी ने बताया कि अभी 12 घंटे की हड़ताल कर सरकार को चेतावनी दी है। चार सूत्रीय मांग पूरी न होने पर दो अप्रैल से मेडिकल छात्र और जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर जाएंगे।
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दर्द से तड़पती महिला
- फोटो : अमर उजाला
आगरा से यूपी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुधीर धाकरे, डॉ. डीवी शर्मा, डॉ. अशोक शिरोमणि, डॉ आलोक मित्तल, डॉ. रविंद्र भदौरिया, डॉ. आरएस कपूर, डॉ. सुबीर कुमार समेत 200 से अधिक चिकित्सक इसमें शामिल हुए। सचिव डॉ. ओपी यादव ने बताया कि महापंचायत में केंद्र सरकार से एनएमसी बिल वापस लेने, डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाकर अनुपालन कराने, आल इंडिया हेल्थ सर्विस योजना बनाने और हर्जाने के मामलों में डॉक्टरों पर रियायत बरतने की मांग की है।
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नो वर्क का बोर्ड लगा दिया
- फोटो : अमर उजाला
तोता के ताल स्थित आईएमए भवन पर डॉक्टरों ने बैठक कर बिल की खामियों पर चर्चा की। डॉ. जेएन टंडन ने बिल की खामियां गिनाते हुए कहा कि इससे इलाज महंगा हो जाएगा। डॉ. सुनील शर्मा बोले कि बिल लागू होने पर प्राइवेट मेडिकल कालेज मेडिकल सीटों की खरीद-फरोख्त करेंगे। डॉ. संजय चतुर्वेदी ने बिल की खामियां पर चिकित्सकों को अपना पक्ष रखने की बात कही। बैठक के बाद चिकित्सकों ने केंद्र सरकार और बिल के खिलाफ नारेबाजी कर बिल वापस लेने की मांग की।