श्री पारस अस्पताल के पीड़ितों ने डीवीआर से छेड़छाड़ के आरोप लगाते हुए जांच में देरी पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जांच के पहले दिन ही डीवीआर क्यों जब्त नहीं किया गया ? आईएमए की जांच में मरीजों के परिजनों का कहना है कि 26 अप्रैल को सुबह सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए थे। डीवीआर को जांच के लिए लखनऊ लैब भेजा गया है।
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श्री पारस अस्पताल प्रकरण: जांच के पहले दिन ही जब्त क्यों नहीं किया गया डीवीआर ?
Mon, 12 Jul 2021 12:20 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 12 Jul 2021 12:20 PM IST
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श्री पारस अस्पताल: डीवीआर ले जाता पुलिसकर्मी (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
श्री पारस अस्पताल आगरा
- फोटो : अमर उजाला
श्री पारस अस्पताल में 26 अप्रैल को दम तोड़ने वाली मीना ग्रोवर की ननद गीतिमा ने बताया कि हम जब भी अस्पताल में अपने मरीज मिलने जाते थे तो सीसीटीवी कैमरों से हमें मरीज को दिखाया जाता था। उनकी तबीयत में सुधार हो रहा था। 25 अप्रैल की रात मेरी ननद ने वीडियो कॉल से बात की थी, लेकिन 26 को अचानक उनकी मौत हो गई। सीसीटीवी फुटेज की जांच से सच्चाई सामने आ जाती, परंतु पुलिस व प्रशासन ने सीसीटीवी फुटेज को जांच में देरी से शामिल किया। जांच के पहले ही दिन अधिकारियों ने डीवीआर क्यों जब्त नहीं किया। अब जो डीवीआर दिया गया है क्या उसके फुटेज अस्पताल प्रबंधन ने नष्ट नहीं किए होंगे।
श्री पारस अस्पताल के गेट पर चस्पा नोटिस
- फोटो : अमर उजाला
ये उठे सवाल
- सीसीटीवी फुटेज जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य को क्यों नजरअंदाज किया गया।
- जांच के पहले दिन ही हॉस्पिटल का डीवीआर जब्त क्यों नहीं किया गया।
- क्या पुलिस को दिए गए डीवीआर से उस दिन के साक्ष्य मिटाये जा चुके हैं।
- पुलिस व प्रशासन द्वारा डीवीआर जब्त करने में लापरवाही क्यों बरती गई।
- क्या 26 अप्रैल की सुबह सात बजे मॉकड्रिल के समय सीसीटीवी बंद था।
- नेक नीयत से अगर काम हुआ तो मॉकड्रिल की वीडियोग्राफी क्यों नहीं की।
- सीसीटीवी फुटेज जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य को क्यों नजरअंदाज किया गया।
- जांच के पहले दिन ही हॉस्पिटल का डीवीआर जब्त क्यों नहीं किया गया।
- क्या पुलिस को दिए गए डीवीआर से उस दिन के साक्ष्य मिटाये जा चुके हैं।
- पुलिस व प्रशासन द्वारा डीवीआर जब्त करने में लापरवाही क्यों बरती गई।
- क्या 26 अप्रैल की सुबह सात बजे मॉकड्रिल के समय सीसीटीवी बंद था।
- नेक नीयत से अगर काम हुआ तो मॉकड्रिल की वीडियोग्राफी क्यों नहीं की।
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श्री पारस अस्पताल: मुख्य दरवाजे पर तैनात पुलिसकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस चाहे तो एक सप्ताह में ले सकती है डीवीआर की रिपोर्ट
श्री पारस अस्पताल में 26, 27 और 28 अप्रैल को आखिर क्या हुआ था, इसका सच जानने के लिए सीसीटीवी के कैमरों के डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर) को लखनऊ की विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच कब तक पूरी होगी, यह पता नहीं है। इससे केस की विवेचना में देरी जरूर हो रही है। पुलिस के एक्सपर्ट का कहना है कि पुलिस केस को प्राथमिकता पर लेकर लैब से रिपोर्ट मांगेगी तो वह सात दिन में मिल सकती है।
श्री पारस अस्पताल में 26, 27 और 28 अप्रैल को आखिर क्या हुआ था, इसका सच जानने के लिए सीसीटीवी के कैमरों के डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर) को लखनऊ की विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच कब तक पूरी होगी, यह पता नहीं है। इससे केस की विवेचना में देरी जरूर हो रही है। पुलिस के एक्सपर्ट का कहना है कि पुलिस केस को प्राथमिकता पर लेकर लैब से रिपोर्ट मांगेगी तो वह सात दिन में मिल सकती है।
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श्री पारस अस्पताल आगरा
- फोटो : अमर उजाला
सेवानिवृत्त सीओ बीएस त्यागी ने बताया कि न्यू आगरा स्थित एक शिक्षण संस्थान में 15 मार्च 2013 में शोध छात्रा की हत्या की गई थी। तब आरोपी ने अपने मोबाइल से अपनी एक परिचित छात्रा को मैसेज किया था। छात्रा ने मैसेज को डिलीट कर दिया था। पुलिस ने आरोपी के बयान के बाद छात्रा का मोबाइल और आरोपी का मोबाइल कब्जे में लिया था। इस मोबाइल से कुछ ही दिन में मैसेज को रिकवर कर लिया था। इसी तरह श्री पारस अस्पताल का डीवीआर अगर, लैब भेजा गया है तो फुटेज प्राप्त करना आसान है।