आगरा के सिकंदरा स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में हुए हादसे में मारे गए चारों दोस्त सैर सपाटे के लिए आए थे। यहां की सड़कें दिन भर सुनसान रहती हैं। मुश्किल से सौ वाहन ही गुजरते हैं। चारों का इरादा दोस्तों के साथ कुछ पल बिताने का रहा होगा लेकिन उनका सफर अंतिम सफर बन गया। जिस जगह हादसा हुआ, वहां आस पास टायर घिसने के निशान नहीं है। इससे माना जा रहा है कि ब्रेक नहीं लगाए गए।
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मृतक ज्योति
- फोटो : अमर उजाला
गाड़ी की रफ्तार भी ज्यादा नहीं थी। कुछ लोगों ने कार को हादसे से पहले देखा था। इसकी गति सामान्य थी। कार शास्त्रीपुरम की ओर से आ रही थी। गति कम होने के बावजूद रेलिंग टूटी है। इससे पुलिस का मानना है कि चालक का ध्यान कहीं और होगा। हो सकता है कि सामने से अचानक कुछ आ गया हो जिसे वह देख रहा हो। यह भी हो सकता है कि अंदर दोस्तों के बीच बात चल रही हो, उसमें उसका ध्यान लगा हो।
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मृतक प्रमोद मिश्रा
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अगर कार की रफ्तार ज्यादा होती तो यह पलटती नहीं बल्कि सीधी गिरती। कार को प्रमोद मिश्रा चला रहा था। हादसे के वक्त पास ही कुछ लोग खड़े थे। वे शराब के ठेके पर थे। उनके मुंह ठेके की तरफ थे। कार के नाले में गिर जाने के बाद उन्हें आवाज आई। एक ने नाले पर आकर देखा। तब उसे पता चला कि कार नाले में समा गई है।
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मृतक गौरव वर्मा
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जिस जगह हादसा हुआ, वहां मोड़ है। कार को नाले से बचाना था। ड्राइवर ने इसका ध्यान नहीं दिया। सामने नाला था। कार उसी की तरफ चली गई। उसे रोका भी नहीं गया। रेलिंग टूटी और कार नाले में समा गई। सबसे पहले प्रमोद की शिनाख्त हुई। उसकी जेब में कई आईडी थी। आधार कार्ड भी था।
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मृतक साक्षी कुशवाहा
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इसके बाद गौरव की आईडी से उसकी पहचान हो गई। साक्षी और ज्योति की पहचान में सबसे ज्यादा समय लगा। ज्योति की तो आईडी ही उसके बैग में नहीं थी। पुलिस को साक्षी का फोन मिला था। इसमें से नंबर निकाले गए। साक्षी के घर फोन किया। उसके परिजनों से ज्योति के घर का पता चला। दोनों के घर पुलिस भेजी गई।