टिन शेड में एक तरफ से खुला मकान। छोटा सा पंखा। एक तरफ तीन बच्चों के साथ बैठी विकलांग बेबी। उसकी सिसकियों की आवाज सुनाई दे रही है। परिवार की महिलाएं किसी तरह उसे संभाल रही हैं। सिसकियों के बीच बस एक ही बात बेबी के मुंह से निकल रही है कि पति (सुनील) शनिवार शाम को गांव की महिला किशनी से शराब पीकर आए। घर आते ही सो गए। रविवार सुबह उठे, मगर फिर सो गए। इसके बाद जागे नहीं। गांव के लोगों को बुलाया। अस्पताल ले गए, जहां पति की मौत हो गई। अब कौन सहारा बनेगा मेरा। दो बेटे और एक बेटी कैसे पल पाएंगे। शराब ने सब कुछ खत्म कर दिया। नगला देवरी के सुनील सिंह (34) की मौत से पूरा परिवार टूट गया है। उनके छोटे भाई सुधीर जयपुर में कामकाज करते हैं।
आगरा जहरीली शराब कांड: पति आए और सो गए, फिर उठ न सके, शराब ने सब कुछ खत्म कर दिया...
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मां रामबेटी बोलीं कि घर में चार दिन से चूल्हा नहीं सुलगा है। लोग जो देकर जाते हैं, उसे बच्चों को खिला देते हैं। कैसे परिवार का पेट पालेंगे समझ नहीं आ रहा है। अधिकारियों से लेकर नेता तक आए लेकिन हर कोई मदद का आश्वासन देकर चला गया। भाई सुधीर ने मांग रखी कि परिवार को आर्थिक सहायता सरकार की ओर से मिलनी चाहिए। जहरीली शराब बेचने वालों केे खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
ताराचंद की मौत से खत्म हो गया परिवार
गांव के ताराचंद (47) की भी शराब पीने के बाद मौत हुई है। वह मजदूरी करते थे। शादी नहीं हुई थी। परिवार के लाचारी राम ने बताया कि ताराचंद के माता-पिता, भाई मोहन सिंह और लाखन की पहले ही मौत हो गई थी। अकेला तारांचद बचा था। जहरीली शराब ने उसे भी मौत की नींद सुला दिया। लाचारी राम भी किसी तरह घर का खर्च चला पाते हैं। परिवार में मातम है।
गांव में शराब से मरने वाले तीसरे व्यक्ति रामसहाय के परिवार का हाल बेहाल है। रामसहाय के चार बच्चे 13 साल की संजना, दस साल की वंदना, आठ साल की प्रिया और चार साल का बेटा संगम है। तीन दिन से घर में चूल्हा नहीं जला है। पत्नी मंजू देवी ने बताया कि पति गांव के लोगों की बकरी चराने ले जाते थे। लोग जो रुपये देते थे, उसे रख लेते थे। महीने में बमुश्किल एक से दो हजार रुपये मिल जाते थे। गांव में सस्ती शराब एक घर से मिलती है। इसे ही पीकर आ जाते थे। उनकी मौत से परिवार टूट गया है। रामसहाय के भाई सरनाम सब्जी की ठेल लगाते हैं। शिवराम घोड़ा बुग्गी चलाते हैं। तीसरे भाई सियाराम की छह साल पहले मौत हो गई थी। माता-पिता का निधन पहले ही हो चुका है। रामसहाय अलग रहते थे। अब उनके परिवार का कोई सहारा नहीं है। परिवार के लोग शासन से आर्थिक मदद की गुहार लगा रहे हैं।