मासिक शिवरात्रि का दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और महादेव की आराधना करते हुए सुख-शांति और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। अक्तूबर 2026 में मासिक शिवरात्रि का व्रत 8 अक्तूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन रात में शिव पूजा और मंत्र जाप का भी विशेष महत्व माना जाता है। आइए जानते हैं अक्तूबर की मासिक शिवरात्रि की सही तिथि, पूजा विधि और इस व्रत का धार्मिक महत्व।
अक्तूबर में कब है मासिक शिवरात्रि? जानें तिथि, पूजा विधि और व्रत के नियम
मासिक शिवरात्रि का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। अक्तूबर 2026 में मासिक शिवरात्रि का व्रत 8 अक्तूबर को रखा जाएगा। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं।
अक्तूबर में कब है मासिक शिवरात्रि?
पंचांग के अनुसार, अक्तूबर 2026 में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 8 अक्तूबर की रात 10:15 बजे शुरू होगी और 9 अक्तूबर की रात 9:35 बजे समाप्त होगी। शिवरात्रि की पूजा के लिए रात्रि में चतुर्दशी तिथि का होना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी आधार पर अक्तूबर महीने में मासिक शिवरात्रि का व्रत गुरुवार, 8 अक्तूबर 2026 को रखा जाएगा। इस दिन भक्त भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं। कई श्रद्धालु दिनभर उपवास रखने के साथ रात में जागरण, मंत्र जाप और शिव आराधना करते हैं।
रात में क्यों की जाती है शिव पूजा?
मासिक शिवरात्रि में रात्रि पूजा की परंपरा विशेष मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, रात के समय महादेव का ध्यान और पूजन करने से साधना का विशेष फल प्राप्त होता है। कई भक्त इस अवसर पर रात के चार प्रहर में शिव पूजा करते हैं। इस दौरान शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद आदि से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद बेलपत्र, फूल, फल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित की जाती है।
मासिक शिवरात्रि पर कैसे करें पूजा?
- मासिक शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान करके भगवान शिव का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।
- इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
- शिवलिंग पर सबसे पहले जल या गंगाजल चढ़ाएं।
- इसके बाद परंपरा के अनुसार दूध आदि से अभिषेक किया जा सकता है।
- महादेव को बेलपत्र, फूल और फल अर्पित करें।
- पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
- रात में शिव मंदिर जाकर दर्शन और पूजा करने की भी परंपरा है।
- अगर मंदिर जाना संभव न हो तो घर में भगवान शिव की तस्वीर या शिवलिंग के सामने दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है।
मासिक शिवरात्रि व्रत का क्या महत्व है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मासिक शिवरात्रि पर व्रत रखने और भगवान शिव की भक्ति करने से मन को शांति मिलती है। भक्त महादेव से अपने जीवन की परेशानियों को दूर करने और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि विवाहित महिलाएं परिवार की सुख-शांति और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित युवक-युवतियां अच्छे जीवनसाथी की कामना से भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक शिवरात्रि का व्रत नियमित रूप से रखने से व्यक्ति में आध्यात्मिक अनुशासन और शिव भक्ति की भावना बढ़ती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।